بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ عَبَسَ وَتَوَلَّىٰٓ ﴿1﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
उस (नबी) ने त्योरी चढ़ाई और मुँह फेर लिया।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
उसने त्योरी चढ़ाई और मुँह फेर लिया,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
वह अपनी बात पर चीं ब जबीं हो गया
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بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ عَبَسَ وَتَوَلَّىٰٓ ﴿1﴾
उस (नबी) ने त्योरी चढ़ाई और मुँह फेर लिया।
उसने त्योरी चढ़ाई और मुँह फेर लिया,
वह अपनी बात पर चीं ब जबीं हो गया
أَن جَآءَهُ ٱلْأَعْمَىٰ ﴿2﴾
इस कारण कि उनके पास अंधा आया।
इस कारण कि उसके पास अन्धा आ गया।
और मुँह फेर बैठा कि उसके पास नाबीना आ गया
وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّهُۥ يَزَّكَّىٰٓ ﴿3﴾
और आपको क्या मालूम शायद वह पवित्रता प्राप्त कर ले।
और तुझे क्या मालूम शायद वह स्वयं को सँवारता-निखारता हो
और तुमको क्या मालूम यायद वह (तालीम से) पाकीज़गी हासिल करता
أَوْ يَذَّكَّرُ فَتَنفَعَهُ ٱلذِّكْرَىٰٓ ﴿4﴾
या नसीहत ग्रहण करे, तो वह नसीहत उसे लाभ दे।
या नसीहत हासिल करता हो तो नसीहत उसके लिए लाभदायक हो?
या वह नसीहत सुनता तो नसीहत उसके काम आती
أَمَّا مَنِ ٱسْتَغْنَىٰ ﴿5﴾
लेकिन जो बेपरवाह हो गया।
रहा वह व्यक्ति जो धनी हो गया ह
तो जो कुछ परवाह नहीं करता
فَأَنتَ لَهُۥ تَصَدَّىٰ ﴿6﴾
तो आप उसके पीछे पड़ रहे हैं।
तू उसके पीछे पड़ा है -
उसके तो तुम दरपै हो जाते हो हालॉकि अगर वह न सुधरे
وَمَا عَلَيْكَ أَلَّا يَزَّكَّىٰ ﴿7﴾
हालाँकि आपपर कोई दोष नहीं कि वह पवित्रता ग्रहण नहीं करता।
हालाँकि वह अपने को न निखारे तो तुझपर कोई ज़िम्मेदारी नहीं आती -
तो तुम ज़िम्मेदार नहीं
وَأَمَّا مَن جَآءَكَ يَسْعَىٰ ﴿8﴾
लेकिन जो व्यक्ति आपके पास दौड़ता हुआ आया।
और रहा वह व्यक्ति जो स्वयं ही तेरे पास दौड़ता हुआ आया,
और जो तुम्हारे पास लपकता हुआ आता है
وَهُوَ يَخْشَىٰ ﴿9﴾
और वह डर (भी) रहा है।
और वह डरता भी है,
और (ख़ुदा से) डरता है
فَأَنتَ عَنْهُ تَلَهَّىٰ ﴿10﴾
तो आप उसकी ओर ध्यान नहीं देते।[1]
तो तू उससे बेपरवाई करता है
तो तुम उससे बेरूख़ी करते हो
كَلَّآ إِنَّهَا تَذْكِرَةٌۭ ﴿11﴾
ऐसा हरगिज़ नहीं चाहिए, यह (क़ुरआन) तो एक उपदेश है।
कदापि नहीं, वे (आयतें) तो महत्वपूर्ण नसीहत है -
देखो ये (क़ुरान) तो सरासर नसीहत है
فَمَن شَآءَ ذَكَرَهُۥ ﴿12﴾
अतः जो चाहे, उसे याद करे।
तो जो चाहे उसे याद कर ले -
तो जो चाहे इसे याद रखे
فِى صُحُفٍۢ مُّكَرَّمَةٍۢ ﴿13﴾
(यह क़ुरआन) सम्मानित सहीफ़ों (ग्रंथों) में है।
पवित्र पन्नों में अंकित है,
(लौहे महफूज़ के) बहुत मोअज़ज़िज औराक़ में (लिखा हुआ) है
مَّرْفُوعَةٍۢ مُّطَهَّرَةٍۭ ﴿14﴾
जो उच्च स्थान वाले तथा पवित्र हैं।
प्रतिष्ठि्त, उच्च,
बुलन्द मरतबा और पाक हैं
بِأَيْدِى سَفَرَةٍۢ ﴿15﴾
ऐसे लिखने वालों (फ़रिश्तों) के हाथों में हैं।
ऐसे कातिबों के हाथों में रहा करते है
(ऐसे) लिखने वालों के हाथों में है
كِرَامٍۭ بَرَرَةٍۢ ﴿16﴾
जो माननीय और नेक हैं।[2]
जो प्रतिष्ठित और नेक है
जो बुज़ुर्ग नेकोकार हैं
قُتِلَ ٱلْإِنسَٰنُ مَآ أَكْفَرَهُۥ ﴿17﴾
सर्वनाश हो मनुष्य का, वह कितना कृतघ्न (नाशुक्रा) है।
विनष्ट हुआ मनुष्य! कैसा अकृतज्ञ है!
इन्सान हलाक हो जाए वह क्या कैसा नाशुक्रा है
مِنْ أَىِّ شَىْءٍ خَلَقَهُۥ ﴿18﴾
(अल्लाह ने) उसे किस चीज़ से पैदा किया?
उसको किस चीज़ से पैदा किया?
(ख़ुदा ने) उसे किस चीज़ से पैदा किया
مِن نُّطْفَةٍ خَلَقَهُۥ فَقَدَّرَهُۥ ﴿19﴾
एक नुत्फ़े (वीर्य) से उसे पैदा किया, फिर विभिन्न चरणों में उसकी रचना की।
तनिक-सी बूँद से उसको पैदा किया, तो उसके लिए एक अंदाजा ठहराया,
नुत्फे से उसे पैदा किया फिर उसका अन्दाज़ा मुक़र्रर किया
ثُمَّ ٱلسَّبِيلَ يَسَّرَهُۥ ﴿20﴾
फिर उसके लिए रास्ता आसान कर दिया।
फिर मार्ग को देखो, उसे सुगम कर दिया,
फिर उसका रास्ता आसान कर दिया
ثُمَّ أَمَاتَهُۥ فَأَقْبَرَهُۥ ﴿21﴾
फिर उसे मृत्यु दी, फिर उसे क़ब्र में रखवाया।
फिर उसे मृत्यु दी और क्रब में उसे रखवाया,
फिर उसे मौत दी फिर उसे कब्र में दफ़न कराया
ثُمَّ إِذَا شَآءَ أَنشَرَهُۥ ﴿22﴾
फिर जब वह चाहेगा, उसे उठाएगा।
फिर जब चाहेगा उसे (जीवित करके) उठा खड़ा करेगा। -
फिर जब चाहेगा उठा खड़ा करेगा
كَلَّا لَمَّا يَقْضِ مَآ أَمَرَهُۥ ﴿23﴾
हरगिज़ नहीं, अभी तक उसने उसे पूरा नहीं किया, जिसका अल्लाह ने उसे आदेश दिया था।[3]
कदापि नहीं, उसने उसको पूरा नहीं किया जिसका आदेश अल्लाह ने उसे दिया है
सच तो यह है कि ख़ुदा ने जो हुक्म उसे दिया उसने उसको पूरा न किया
فَلْيَنظُرِ ٱلْإِنسَٰنُ إِلَىٰ طَعَامِهِۦٓ ﴿24﴾
अतः इनसान को चाहिए कि अपने भोजन को देखे।
अतः मनुष्य को चाहिए कि अपने भोजन को देखे,
तो इन्सान को अपने घाटे ही तरफ ग़ौर करना चाहिए
أَنَّا صَبَبْنَا ٱلْمَآءَ صَبًّۭا ﴿25﴾
कि हमने ख़ूब पानी बरसाया।
कि हमने ख़ूब पानी बरसाया,
कि हम ही ने (बादल) से पानी बरसाया
ثُمَّ شَقَقْنَا ٱلْأَرْضَ شَقًّۭا ﴿26﴾
फिर हमने धरती को विशेष रूप से फाड़ा।
फिर धरती को विशेष रूप से फाड़ा,
फिर हम ही ने ज़मीन (दरख्त उगाकर) चीरी फाड़ी
فَأَنۢبَتْنَا فِيهَا حَبًّۭا ﴿27﴾
फिर हमने उसमें अनाज उगाया।
फिर हमने उसमें उगाए अनाज,
फिर हमने उसमें अनाज उगाया
وَعِنَبًۭا وَقَضْبًۭا ﴿28﴾
तथा अंगूर और (मवेशियों का) चारा।
और अंगूर और तरकारी,
और अंगूर और तरकारियाँ
وَزَيْتُونًۭا وَنَخْلًۭا ﴿29﴾
तथा ज़ैतून और खजूर के पेड़।
और ज़ैतून और खजूर,
और ज़ैतून और खजूरें
وَحَدَآئِقَ غُلْبًۭا ﴿30﴾
तथा घने बाग़।
और घने बाग़,
और घने घने बाग़ और मेवे
وَفَٰكِهَةًۭ وَأَبًّۭا ﴿31﴾
तथा फल और चारा।
और मेवे और घास-चारा,
और चारा (ये सब कुछ) तुम्हारे और तुम्हारे
مَّتَٰعًۭا لَّكُمْ وَلِأَنْعَٰمِكُمْ ﴿32﴾
तुम्हारे लिए तथा तुम्हारे पशुओं के लिए जीवन-सामग्री के रूप में।[4]
तुम्हारे लिए और तुम्हारे चौपायों के लिेए जीवन-सामग्री के रूप में
चारपायों के फायदे के लिए (बनाया)
فَإِذَا جَآءَتِ ٱلصَّآخَّةُ ﴿33﴾
तो जब कानों को बहरा कर देने वाली प्रचंड आवाज़ (क़ियामत) आ जाएगी।
फिर जब वह बहरा कर देनेवाली प्रचंड आवाज़ आएगी,
तो जब कानों के परदे फाड़ने वाली (क़यामत) आ मौजूद होगी
يَوْمَ يَفِرُّ ٱلْمَرْءُ مِنْ أَخِيهِ ﴿34﴾
जिस दिन इनसान अपने भाई से भागेगा।
जिस दिन आदमी भागेगा अपने भाई से,
उस दिन आदमी अपने भाई
وَأُمِّهِۦ وَأَبِيهِ ﴿35﴾
तथा अपनी माता और अपने पिता (से)।
और अपनी माँ और अपने बाप से,
और अपनी माँ और अपने बाप
وَصَٰحِبَتِهِۦ وَبَنِيهِ ﴿36﴾
तथा अपनी पत्नी और अपने बेटों से।
और अपनी पत्नी और अपने बेटों से
और अपने लड़के बालों से भागेगा
لِكُلِّ ٱمْرِئٍۢ مِّنْهُمْ يَوْمَئِذٍۢ شَأْنٌۭ يُغْنِيهِ ﴿37﴾
उस दिन उनमें से प्रत्येक व्यक्ति की ऐसी स्थिति होगी, जो उसे (दूसरों से) बेपरवाह कर देगी।
उनमें से प्रत्येक व्यक्ति को उस दिन ऐसी पड़ी होगी जो उसे दूसरों से बेपरवाह कर देगी
उस दिन हर शख़्श (अपनी नजात की) ऐसी फ़िक्र में होगा जो उसके (मशग़ूल होने के) लिए काफ़ी हों
وُجُوهٌۭ يَوْمَئِذٍۢ مُّسْفِرَةٌۭ ﴿38﴾
उस दिन कुछ चेहरे रौशन होंगे।
कितने ही चेहरे उस दिन रौशन होंगे,
बहुत से चेहरे तो उस दिन चमकते होंगे
ضَاحِكَةٌۭ مُّسْتَبْشِرَةٌۭ ﴿39﴾
हँसते हुए, प्रसन्न होंगे।
हँसते, प्रफुल्लित
ख़न्दाँ शांदाँ (यही नेको कार हैं)
وَوُجُوهٌۭ يَوْمَئِذٍ عَلَيْهَا غَبَرَةٌۭ ﴿40﴾
तथा कुछ चेहरों उस दिन धूल से ग्रस्त होंगे।
और कितने ही चेहरे होंगे जिनपर उस दिन धूल पड़ी होगी,
और बहुत से चेहरे ऐसे होंगे जिन पर गर्द पड़ी होगी
تَرْهَقُهَا قَتَرَةٌ ﴿41﴾
उनपर कालिमा छाई होगी।
उनपर कलौंस छा रही होगी
उस पर सियाही छाई हुई होगी
أُو۟لَٰٓئِكَ هُمُ ٱلْكَفَرَةُ ٱلْفَجَرَةُ ﴿42﴾
वही काफ़िर और कुकर्मी लोग हैं।[5]
वहीं होंगे इनकार करनेवाले दुराचारी लोग!
यही कुफ्फ़ार बदकार हैं