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بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ عَبَسَ وَتَوَلَّىٰٓ ﴿1﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

उसने त्योरी चढ़ाई और मुँह फेर लिया,

أَن جَآءَهُ ٱلْأَعْمَىٰ ﴿2﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

इस कारण कि उसके पास अन्धा आ गया।

وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّهُۥ يَزَّكَّىٰٓ ﴿3﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और तुझे क्या मालूम शायद वह स्वयं को सँवारता-निखारता हो

أَوْ يَذَّكَّرُ فَتَنفَعَهُ ٱلذِّكْرَىٰٓ ﴿4﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

या नसीहत हासिल करता हो तो नसीहत उसके लिए लाभदायक हो?

أَمَّا مَنِ ٱسْتَغْنَىٰ ﴿5﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

रहा वह व्यक्ति जो धनी हो गया ह

فَأَنتَ لَهُۥ تَصَدَّىٰ ﴿6﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

तू उसके पीछे पड़ा है -

وَمَا عَلَيْكَ أَلَّا يَزَّكَّىٰ ﴿7﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

हालाँकि वह अपने को न निखारे तो तुझपर कोई ज़िम्मेदारी नहीं आती -

وَأَمَّا مَن جَآءَكَ يَسْعَىٰ ﴿8﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और रहा वह व्यक्ति जो स्वयं ही तेरे पास दौड़ता हुआ आया,

وَهُوَ يَخْشَىٰ ﴿9﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और वह डरता भी है,

فَأَنتَ عَنْهُ تَلَهَّىٰ ﴿10﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

तो तू उससे बेपरवाई करता है

كَلَّآ إِنَّهَا تَذْكِرَةٌۭ ﴿11﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

कदापि नहीं, वे (आयतें) तो महत्वपूर्ण नसीहत है -

فَمَن شَآءَ ذَكَرَهُۥ ﴿12﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

तो जो चाहे उसे याद कर ले -

فِى صُحُفٍۢ مُّكَرَّمَةٍۢ ﴿13﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

पवित्र पन्नों में अंकित है,

مَّرْفُوعَةٍۢ مُّطَهَّرَةٍۭ ﴿14﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

प्रतिष्ठि्त, उच्च,

بِأَيْدِى سَفَرَةٍۢ ﴿15﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

ऐसे कातिबों के हाथों में रहा करते है

كِرَامٍۭ بَرَرَةٍۢ ﴿16﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

जो प्रतिष्ठित और नेक है

قُتِلَ ٱلْإِنسَٰنُ مَآ أَكْفَرَهُۥ ﴿17﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

विनष्ट हुआ मनुष्य! कैसा अकृतज्ञ है!

مِنْ أَىِّ شَىْءٍ خَلَقَهُۥ ﴿18﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

उसको किस चीज़ से पैदा किया?

مِن نُّطْفَةٍ خَلَقَهُۥ فَقَدَّرَهُۥ ﴿19﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

तनिक-सी बूँद से उसको पैदा किया, तो उसके लिए एक अंदाजा ठहराया,

ثُمَّ ٱلسَّبِيلَ يَسَّرَهُۥ ﴿20﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

फिर मार्ग को देखो, उसे सुगम कर दिया,

ثُمَّ أَمَاتَهُۥ فَأَقْبَرَهُۥ ﴿21﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

फिर उसे मृत्यु दी और क्रब में उसे रखवाया,

ثُمَّ إِذَا شَآءَ أَنشَرَهُۥ ﴿22﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

फिर जब चाहेगा उसे (जीवित करके) उठा खड़ा करेगा। -

كَلَّا لَمَّا يَقْضِ مَآ أَمَرَهُۥ ﴿23﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

कदापि नहीं, उसने उसको पूरा नहीं किया जिसका आदेश अल्लाह ने उसे दिया है

فَلْيَنظُرِ ٱلْإِنسَٰنُ إِلَىٰ طَعَامِهِۦٓ ﴿24﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

अतः मनुष्य को चाहिए कि अपने भोजन को देखे,

أَنَّا صَبَبْنَا ٱلْمَآءَ صَبًّۭا ﴿25﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

कि हमने ख़ूब पानी बरसाया,

ثُمَّ شَقَقْنَا ٱلْأَرْضَ شَقًّۭا ﴿26﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

फिर धरती को विशेष रूप से फाड़ा,

فَأَنۢبَتْنَا فِيهَا حَبًّۭا ﴿27﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

फिर हमने उसमें उगाए अनाज,

وَعِنَبًۭا وَقَضْبًۭا ﴿28﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और अंगूर और तरकारी,

وَزَيْتُونًۭا وَنَخْلًۭا ﴿29﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और ज़ैतून और खजूर,

وَحَدَآئِقَ غُلْبًۭا ﴿30﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और घने बाग़,

وَفَٰكِهَةًۭ وَأَبًّۭا ﴿31﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और मेवे और घास-चारा,

مَّتَٰعًۭا لَّكُمْ وَلِأَنْعَٰمِكُمْ ﴿32﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

तुम्हारे लिए और तुम्हारे चौपायों के लिेए जीवन-सामग्री के रूप में

فَإِذَا جَآءَتِ ٱلصَّآخَّةُ ﴿33﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

फिर जब वह बहरा कर देनेवाली प्रचंड आवाज़ आएगी,

يَوْمَ يَفِرُّ ٱلْمَرْءُ مِنْ أَخِيهِ ﴿34﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

जिस दिन आदमी भागेगा अपने भाई से,

وَأُمِّهِۦ وَأَبِيهِ ﴿35﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और अपनी माँ और अपने बाप से,

وَصَٰحِبَتِهِۦ وَبَنِيهِ ﴿36﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और अपनी पत्नी और अपने बेटों से

لِكُلِّ ٱمْرِئٍۢ مِّنْهُمْ يَوْمَئِذٍۢ شَأْنٌۭ يُغْنِيهِ ﴿37﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

उनमें से प्रत्येक व्यक्ति को उस दिन ऐसी पड़ी होगी जो उसे दूसरों से बेपरवाह कर देगी

وُجُوهٌۭ يَوْمَئِذٍۢ مُّسْفِرَةٌۭ ﴿38﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

कितने ही चेहरे उस दिन रौशन होंगे,

ضَاحِكَةٌۭ مُّسْتَبْشِرَةٌۭ ﴿39﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

हँसते, प्रफुल्लित

وَوُجُوهٌۭ يَوْمَئِذٍ عَلَيْهَا غَبَرَةٌۭ ﴿40﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और कितने ही चेहरे होंगे जिनपर उस दिन धूल पड़ी होगी,

تَرْهَقُهَا قَتَرَةٌ ﴿41﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

उनपर कलौंस छा रही होगी

أُو۟لَٰٓئِكَ هُمُ ٱلْكَفَرَةُ ٱلْفَجَرَةُ ﴿42﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

वहीं होंगे इनकार करनेवाले दुराचारी लोग!

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