بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلضُّحَىٰ ﴿1﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
कस़म है धूप चढ़ने के समय की!
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
साक्षी है चढ़ता दिन,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
(ऐ रसूल) पहर दिन चढ़े की क़सम
Compare up to three verified translation editions verse by verse, including editions in two different languages.
Changing languages or editions keeps the current surah and verse.
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلضُّحَىٰ ﴿1﴾
कस़म है धूप चढ़ने के समय की!
साक्षी है चढ़ता दिन,
(ऐ रसूल) पहर दिन चढ़े की क़सम
وَٱلَّيْلِ إِذَا سَجَىٰ ﴿2﴾
और क़सम है रात की, जब वह छा जाए।
और रात जबकि उसका सन्नाटा छा जाए
और रात की जब (चीज़ों को) छुपा ले
مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلَىٰ ﴿3﴾
(ऐ नबी!) तेरे पालनहार ने तुझे न तो छोड़ा और न नाराज़ हुआ।
तुम्हारे रब ने तुम्हें न तो विदा किया और न वह बेज़ार (अप्रसन्न) हुआ
कि तुम्हारा परवरदिगार न तुमको छोड़ बैठा और (न तुमसे) नाराज़ हुआ
وَلَلْءَاخِرَةُ خَيْرٌۭ لَّكَ مِنَ ٱلْأُولَىٰ ﴿4﴾
और निश्चित रूप से आख़िरत आपके लिए दुनिया से बेहतर है।
और निश्चय ही बाद में आनेवाली (अवधि) तुम्हारे लिए पहलेवाली से उत्तम है
और तुम्हारे वास्ते आख़ेरत दुनिया से यक़ीनी कहीं बेहतर है
وَلَسَوْفَ يُعْطِيكَ رَبُّكَ فَتَرْضَىٰٓ ﴿5﴾
और निश्चय तेरा पालनहार तुझे प्रदान करेगा, तो तू प्रसन्न हो जाएगा।
और शीघ्र ही तुम्हारा रब तुम्हें प्रदान करेगा कि तुम प्रसन्न हो जाओगे
और तुम्हारा परवरदिगार अनक़रीब इस क़दर अता करेगा कि तुम ख़ुश हो जाओ
أَلَمْ يَجِدْكَ يَتِيمًۭا فَـَٔاوَىٰ ﴿6﴾
क्या उसने आपको अनाथ पाकर शरण नहीं दी?
क्या ऐसा नहीं कि उसने तुम्हें अनाथ पाया तो ठिकाना दिया?
क्या उसने तुम्हें यतीम पाकर (अबू तालिब की) पनाह न दी (ज़रूर दी)
وَوَجَدَكَ ضَآلًّۭا فَهَدَىٰ ﴿7﴾
और आपको मार्ग से अनभिज्ञ पाया, तो सीधा मार्ग दिखाया।
और तुम्हें मार्ग से अपरिचित पाया तो मार्ग दिखाया?
और तुमको एहकाम से नावाकिफ़ देखा तो मंज़िले मक़सूद तक पहुँचा दिया
وَوَجَدَكَ عَآئِلًۭا فَأَغْنَىٰ ﴿8﴾
और उसने आपको निर्धन पाया, तो संपन्न कर दिया।
और तुम्हें निर्धन पाया तो समृद्ध कर दिया?
और तुमको तंगदस्त देखकर ग़नी कर दिया
فَأَمَّا ٱلْيَتِيمَ فَلَا تَقْهَرْ ﴿9﴾
अतः आप अनाथ पर कठोरता न दिखाएँ।[1]
अतः जो अनाथ हो उसे मत दबाना,
तो तुम भी यतीम पर सितम न करना
وَأَمَّا ٱلسَّآئِلَ فَلَا تَنْهَرْ ﴿10﴾
और माँगने वाले को न झिड़कें।
और जो माँगता हो उसे न झिझकना,
माँगने वाले को झिड़की न देना
وَأَمَّا بِنِعْمَةِ رَبِّكَ فَحَدِّثْ ﴿11﴾
और अपने रब के उपकार का वर्णन करते रहें।[2]
और जो तुम्हें रब की अनुकम्पा है, उसे बयान करते रहो
और अपने परवरदिगार की नेअमतों का ज़िक्र करते रहना