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بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلضُّحَىٰ ﴿1﴾
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
साक्षी है चढ़ता दिन,
وَٱلَّيْلِ إِذَا سَجَىٰ ﴿2﴾
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
और रात जबकि उसका सन्नाटा छा जाए
مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلَىٰ ﴿3﴾
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
तुम्हारे रब ने तुम्हें न तो विदा किया और न वह बेज़ार (अप्रसन्न) हुआ
وَلَلْءَاخِرَةُ خَيْرٌۭ لَّكَ مِنَ ٱلْأُولَىٰ ﴿4﴾
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
और निश्चय ही बाद में आनेवाली (अवधि) तुम्हारे लिए पहलेवाली से उत्तम है
وَلَسَوْفَ يُعْطِيكَ رَبُّكَ فَتَرْضَىٰٓ ﴿5﴾
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
और शीघ्र ही तुम्हारा रब तुम्हें प्रदान करेगा कि तुम प्रसन्न हो जाओगे
أَلَمْ يَجِدْكَ يَتِيمًۭا فَـَٔاوَىٰ ﴿6﴾
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
क्या ऐसा नहीं कि उसने तुम्हें अनाथ पाया तो ठिकाना दिया?
وَوَجَدَكَ ضَآلًّۭا فَهَدَىٰ ﴿7﴾
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
और तुम्हें मार्ग से अपरिचित पाया तो मार्ग दिखाया?
وَوَجَدَكَ عَآئِلًۭا فَأَغْنَىٰ ﴿8﴾
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
और तुम्हें निर्धन पाया तो समृद्ध कर दिया?
فَأَمَّا ٱلْيَتِيمَ فَلَا تَقْهَرْ ﴿9﴾
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
अतः जो अनाथ हो उसे मत दबाना,
وَأَمَّا ٱلسَّآئِلَ فَلَا تَنْهَرْ ﴿10﴾
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
और जो माँगता हो उसे न झिझकना,
وَأَمَّا بِنِعْمَةِ رَبِّكَ فَحَدِّثْ ﴿11﴾
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
और जो तुम्हें रब की अनुकम्पा है, उसे बयान करते रहो