بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلْبُرُوجِ ﴿1﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
क़सम है बुर्जों वाले आकाश की!
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
साक्षी है बुर्जोंवाला आकाश,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
बुर्ज़ों वाले आसमानों की क़सम
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بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلْبُرُوجِ ﴿1﴾
क़सम है बुर्जों वाले आकाश की!
साक्षी है बुर्जोंवाला आकाश,
बुर्ज़ों वाले आसमानों की क़सम
وَٱلْيَوْمِ ٱلْمَوْعُودِ ﴿2﴾
और क़सम है उस दिन की, जिसका वादा किया गया है!
और वह दिन जिसका वादा किया गया है,
और उस दिन की जिसका वायदा किया गया है
وَشَاهِدٍۢ وَمَشْهُودٍۢ ﴿3﴾
क़सम है गवाह की और उसकी, जिसके बारे में गवाही दी जाएगी!
और देखनेवाला, और जो देखा गया
और गवाह की और जिसकी गवाही दे जाएगी
قُتِلَ أَصْحَٰبُ ٱلْأُخْدُودِ ﴿4﴾
खाई वालों का नाश हो गया![1]
विनष्ट हों खाईवाले,
उसकी (कि कुफ्फ़ार मक्का हलाक हुए) जिस तरह ख़न्दक़ वाले हलाक कर दिए गए
ٱلنَّارِ ذَاتِ ٱلْوَقُودِ ﴿5﴾
जिसमें ईंधन से भरी आग थी।
ईधन भरी आगवाले,
जो ख़न्दक़ें आग की थीं
إِذْ هُمْ عَلَيْهَا قُعُودٌۭ ﴿6﴾
जबकि वे उस (के किनारों) पर बैठे हुए थे।
जबकि वे वहाँ बैठे होंगे
जिसमें (उन्होंने मुसलमानों के लिए) ईंधन झोंक रखा था
وَهُمْ عَلَىٰ مَا يَفْعَلُونَ بِٱلْمُؤْمِنِينَ شُهُودٌۭ ﴿7﴾
और वे ईमान वालों के साथ जो कुछ कर रहे थे, उस पर गवाह थे।
और वे जो कुछ ईमानवालों के साथ करते रहे, उसे देखेंगे
जब वह उन (ख़न्दक़ों) पर बैठे हुए और जो सुलूक ईमानदारों के साथ करते थे उसको सामने देख रहे थे
وَمَا نَقَمُوا۟ مِنْهُمْ إِلَّآ أَن يُؤْمِنُوا۟ بِٱللَّهِ ٱلْعَزِيزِ ٱلْحَمِيدِ ﴿8﴾
और उन्हें ईमान वालों की केवल यह बात बुरी लगी कि वे उस अल्लाह पर ईमान रखते थे, जो प्रभुत्वशाली और हर प्रकार की प्रशंसा के योग्य है।
उन्होंने उन (ईमानवालों) से केवल इस कारण बदला लिया और शत्रुता की कि वे उस अल्लाह पर ईमान रखते थे जो अत्यन्त प्रभुत्वशाली, प्रशंसनीय है,
और उनको मोमिनीन की यही बात बुरी मालूम हुई कि वह लोग ख़ुदा पर ईमान लाए थे जो ज़बरदस्त और सज़ावार हम्द है
ٱلَّذِى لَهُۥ مُلْكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۚ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ شَهِيدٌ ﴿9﴾
वह (अल्लाह) कि जिसके लिए आकाशों और धरती का राज्य है, और अल्लाह हर चीज़ से अवगत है।
जिसके लिए आकाशों और धरती की बादशाही है। और अल्लाह हर चीज़ का साक्षी है
वह (ख़ुदा) जिसकी सारे आसमान ज़मीन में बादशाहत है और ख़ुदा हर चीज़ से वाक़िफ़ है
إِنَّ ٱلَّذِينَ فَتَنُوا۟ ٱلْمُؤْمِنِينَ وَٱلْمُؤْمِنَٰتِ ثُمَّ لَمْ يَتُوبُوا۟ فَلَهُمْ عَذَابُ جَهَنَّمَ وَلَهُمْ عَذَابُ ٱلْحَرِيقِ ﴿10﴾
निश्चय जिन लोगों ने ईमान वाले पुरुषों और ईमान वाली स्त्रियों को परीक्षण में डाला (सताया), फिर तौबा न की, तो उनके लिए जहन्नम की यातना है तथा उनके लिए जलाने वाली यातना है।
जिन लोगों ने ईमानवाले पुरुषों और ईमानवाली स्त्रियों को सताया और आज़माईश में डाला, फिर तौबा न की, निश्चय ही उनके लिए जहन्नम की यातना है और उनके लिए जलने की यातना है
बेशक जिन लोगों ने ईमानदार मर्दों और औरतों को तकलीफें दीं फिर तौबा न की उनके लिए जहन्नुम का अज़ाब तो है ही (इसके अलावा) जलने का भी अज़ाब होगा
إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ لَهُمْ جَنَّٰتٌۭ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَٰرُ ۚ ذَٰلِكَ ٱلْفَوْزُ ٱلْكَبِيرُ ﴿11﴾
निःसंदेह जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे काम किए, उनके लिए ऐसे बाग़ हैं, जिनके नीचे नहरें बह रही हैं और यही बहुत बड़ी सफलता है।[2]
निश्चय ही जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके लिए बाग़ है, जिनके नीचे नहरें बह रही होगी। वही है बड़ी सफलता
बेशक जो लोग ईमान लाए और अच्छे काम करते रहे उनके लिए वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरें जारी हैं यही तो बड़ी कामयाबी है
إِنَّ بَطْشَ رَبِّكَ لَشَدِيدٌ ﴿12﴾
निःसंदेह तेरे पालनहार की पकड़ बड़ी सख्त है।
वास्तव में तुम्हारे रब की पकड़ बड़ी ही सख़्त है
बेशक तुम्हारे परवरदिगार की पकड़ बहुत सख्त है
إِنَّهُۥ هُوَ يُبْدِئُ وَيُعِيدُ ﴿13﴾
निःसंदेह वही पहली बार पैदा करता है और (वही) दूसरी बार पैदा करेगा।
वही आरम्भ करता है और वही पुनरावृत्ति करता है,
वही पहली दफ़ा पैदा करता है और वही दोबारा (क़यामत में ज़िन्दा) करेगा
وَهُوَ ٱلْغَفُورُ ٱلْوَدُودُ ﴿14﴾
और वह है जो अत्यंत क्षमा करने वाला, बहुत प्रेम करने वाला है।
वह बड़ा क्षमाशील, बहुत प्रेम करनेवाला है,
और वही बड़ा बख्शने वाला मोहब्बत करने वाला है
ذُو ٱلْعَرْشِ ٱلْمَجِيدُ ﴿15﴾
वह अर्श (सिंहासन) का मालिक, बड़ा गौरवशाली है।
सिंहासन का स्वामी है, बडा गौरवशाली,
अर्श का मालिक बड़ा आलीशान है
فَعَّالٌۭ لِّمَا يُرِيدُ ﴿16﴾
वह जो चाहता है, कर गुज़रने वाला है।[3]
जो चाहे उसे कर डालनेवाला
जो चाहता है करता है
هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ ٱلْجُنُودِ ﴿17﴾
(ऐ नबी!) क्या तुम्हें सेनाओं की ख़बर पहुँची है?
क्या तुम्हें उन सेनाओं की भी ख़बर पहुँची हैं,
क्या तुम्हारे पास लशकरों की ख़बर पहुँची है
فِرْعَوْنَ وَثَمُودَ ﴿18﴾
फ़िरऔन तथा समूद की?[4]
फ़िरऔन और समूद की?
(यानि) फिरऔन व समूद की (ज़रूर पहुँची है)
بَلِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ فِى تَكْذِيبٍۢ ﴿19﴾
बल्कि वे लोग जिन्होंने कुफ़्र किया, झुठलाने में लगे हुए हैं।
नहीं, बल्कि जिन लोगों ने इनकार किया है, वे झुठलाने में लगे हुए है;
मगर कुफ्फ़ार तो झुठलाने ही (की फ़िक्र) में हैं
وَٱللَّهُ مِن وَرَآئِهِم مُّحِيطٌۢ ﴿20﴾
और अल्लाह उनके पीछे से (उन्हें) घेरे हुए है।[5]
हालाँकि अल्लाह उन्हें घेरे हुए है, उनके आगे-पीछे से
और ख़ुदा उनको पीछे से घेरे हुए है (ये झुठलाने के क़ाबिल नहीं)
بَلْ هُوَ قُرْءَانٌۭ مَّجِيدٌۭ ﴿21﴾
बल्कि वह गौरव वाला क़ुरआन है।
नहीं, बल्कि वह तो गौरव क़ुरआन है,
बल्कि ये तो क़ुरान मजीद है
فِى لَوْحٍۢ مَّحْفُوظٍۭ ﴿22﴾
जो लौह़े मह़फ़ूज़ (सुरक्षित पट्टिका) में लिखा हुआ है।[6]
सुरक्षित पट्टिका में अंकित है
जो लौहे महफूज़ में लिखा हुआ है