Skip to content
Text size 100%
Translation comparison

Compare Al-Haqqah Quran translations

Compare up to three verified translation editions verse by verse, including editions in two different languages.

Hindi editions (choose up to 3)

Changing languages or editions keeps the current surah and verse.

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ ٱلْحَآقَّةُ ﴿1﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

होकर रहनेवाली!

مَا ٱلْحَآقَّةُ ﴿2﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

क्या है वह होकर रहनेवाली?

وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْحَآقَّةُ ﴿3﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और तुम क्या जानो कि क्या है वह होकर रहनेवाली?

كَذَّبَتْ ثَمُودُ وَعَادٌۢ بِٱلْقَارِعَةِ ﴿4﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

समूद और आद ने उस खड़खड़ा देनेवाली (घटना) को झुठलाया,

فَأَمَّا ثَمُودُ فَأُهْلِكُوا۟ بِٱلطَّاغِيَةِ ﴿5﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

फिर समूद तो एक हद से बढ़ जानेवाली आपदा से विनष्ट किए गए

وَأَمَّا عَادٌۭ فَأُهْلِكُوا۟ بِرِيحٍۢ صَرْصَرٍ عَاتِيَةٍۢ ﴿6﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और रहे आद, तो वे एक अनियंत्रित प्रचंड वायु से विनष्ट कर दिए गए

سَخَّرَهَا عَلَيْهِمْ سَبْعَ لَيَالٍۢ وَثَمَٰنِيَةَ أَيَّامٍ حُسُومًۭا فَتَرَى ٱلْقَوْمَ فِيهَا صَرْعَىٰ كَأَنَّهُمْ أَعْجَازُ نَخْلٍ خَاوِيَةٍۢ ﴿7﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

अल्लाह ने उसको सात रात और आठ दिन तक उन्मूलन के उद्देश्य से उनपर लगाए रखा। तो लोगों को तुम देखते कि वे उसमें पछाड़े हुए ऐसे पड़े है मानो वे खजूर के जर्जर तने हों

فَهَلْ تَرَىٰ لَهُم مِّنۢ بَاقِيَةٍۢ ﴿8﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

अब क्या तुम्हें उनमें से कोई शेष दिखाई देता है?

وَجَآءَ فِرْعَوْنُ وَمَن قَبْلَهُۥ وَٱلْمُؤْتَفِكَٰتُ بِٱلْخَاطِئَةِ ﴿9﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और फ़िरऔन ने और उससे पहले के लोगों ने और तलपट हो जानेवाली बस्तियों ने यह ख़ता की

فَعَصَوْا۟ رَسُولَ رَبِّهِمْ فَأَخَذَهُمْ أَخْذَةًۭ رَّابِيَةً ﴿10﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

उन्होंने अपने रब के रसूल की अवज्ञा की तो उसने उन्हें ऐसी पकड़ में ले लिया जो बड़ी कठोर थी

إِنَّا لَمَّا طَغَا ٱلْمَآءُ حَمَلْنَٰكُمْ فِى ٱلْجَارِيَةِ ﴿11﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

जब पानी उमड़ आया तो हमने तुम्हें प्रवाहित नौका में सवार किया;

لِنَجْعَلَهَا لَكُمْ تَذْكِرَةًۭ وَتَعِيَهَآ أُذُنٌۭ وَٰعِيَةٌۭ ﴿12﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

ताकि उसे तुम्हारे लिए हम शिक्षाप्रद यादगार बनाएँ और याद रखनेवाले कान उसे सुरक्षित रखें

فَإِذَا نُفِخَ فِى ٱلصُّورِ نَفْخَةٌۭ وَٰحِدَةٌۭ ﴿13﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

तो याद रखो जब सूर (नरसिंघा) में एक फूँक मारी जाएगी,

وَحُمِلَتِ ٱلْأَرْضُ وَٱلْجِبَالُ فَدُكَّتَا دَكَّةًۭ وَٰحِدَةًۭ ﴿14﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और धरती और पहाड़ों को उठाकर एक ही बार में चूर्ण-विचूर्ण कर दिया जाएगा

فَيَوْمَئِذٍۢ وَقَعَتِ ٱلْوَاقِعَةُ ﴿15﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

तो उस दिन घटित होनेवाली घटना घटित हो जाएगी,

وَٱنشَقَّتِ ٱلسَّمَآءُ فَهِىَ يَوْمَئِذٍۢ وَاهِيَةٌۭ ﴿16﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और आकाश फट जाएगा और उस दिन उसका बन्धन ढीला पड़ जाएगा,

وَٱلْمَلَكُ عَلَىٰٓ أَرْجَآئِهَا ۚ وَيَحْمِلُ عَرْشَ رَبِّكَ فَوْقَهُمْ يَوْمَئِذٍۢ ثَمَٰنِيَةٌۭ ﴿17﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और फ़रिश्ते उसके किनारों पर होंगे और उस दिन तुम्हारे रब के सिंहासन को आठ अपने ऊपर उठाए हुए होंगे

يَوْمَئِذٍۢ تُعْرَضُونَ لَا تَخْفَىٰ مِنكُمْ خَافِيَةٌۭ ﴿18﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

उस दिन तुम लोग पेश किए जाओगे, तुम्हारी कोई छिपी बात छिपी न रहेगी

فَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَٰبَهُۥ بِيَمِينِهِۦ فَيَقُولُ هَآؤُمُ ٱقْرَءُوا۟ كِتَٰبِيَهْ ﴿19﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

फिर जिस किसी को उसका कर्म-पत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया, तो वह कहेगा, "लो पढ़ो, मेरा कर्म-पत्र!

إِنِّى ظَنَنتُ أَنِّى مُلَٰقٍ حِسَابِيَهْ ﴿20﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

"मैं तो समझता ही था कि मुझे अपना हिसाब मिलनेवाला है।"

فَهُوَ فِى عِيشَةٍۢ رَّاضِيَةٍۢ ﴿21﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

अतः वह सुख और आनन्दमय जीवन में होगा;

فِى جَنَّةٍ عَالِيَةٍۢ ﴿22﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

उच्च जन्नत में,

قُطُوفُهَا دَانِيَةٌۭ ﴿23﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

जिसके फलों के गुच्छे झुके होंगे

كُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟ هَنِيٓـًٔۢا بِمَآ أَسْلَفْتُمْ فِى ٱلْأَيَّامِ ٱلْخَالِيَةِ ﴿24﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

मज़े से खाओ और पियो उन कर्मों के बदले में जो तुमने बीते दिनों में किए है

وَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَٰبَهُۥ بِشِمَالِهِۦ فَيَقُولُ يَٰلَيْتَنِى لَمْ أُوتَ كِتَٰبِيَهْ ﴿25﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और रहा वह क्यक्ति जिसका कर्म-पत्र उसके बाएँ हाथ में दिया गया, वह कहेगा, "काश, मेरा कर्म-पत्र मुझे न दिया जाता

وَلَمْ أَدْرِ مَا حِسَابِيَهْ ﴿26﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और मैं न जानता कि मेरा हिसाब क्या है!

يَٰلَيْتَهَا كَانَتِ ٱلْقَاضِيَةَ ﴿27﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

"ऐ काश, वह (मृत्यु) समाप्त करनेवाली होती!

مَآ أَغْنَىٰ عَنِّى مَالِيَهْ ۜ ﴿28﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

"मेरा माल मेरे कुछ काम न आया,

هَلَكَ عَنِّى سُلْطَٰنِيَهْ ﴿29﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

"मेरा ज़ोर (सत्ता) मुझसे जाता रहा!"

خُذُوهُ فَغُلُّوهُ ﴿30﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

"पकड़ो उसे और उसकी गरदन में तौक़ डाल दो,

ثُمَّ ٱلْجَحِيمَ صَلُّوهُ ﴿31﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

"फिर उसे भड़कती हुई आग में झोंक दो,

ثُمَّ فِى سِلْسِلَةٍۢ ذَرْعُهَا سَبْعُونَ ذِرَاعًۭا فَٱسْلُكُوهُ ﴿32﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

"फिर उसे एक ऐसी जंजीर में जकड़ दो जिसकी माप सत्तर हाथ है

إِنَّهُۥ كَانَ لَا يُؤْمِنُ بِٱللَّهِ ٱلْعَظِيمِ ﴿33﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

"वह न तो महिमावान अल्लाह पर ईमान रखता था

وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ ﴿34﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और न मुहताज को खाना खिलाने पर उभारता था

فَلَيْسَ لَهُ ٱلْيَوْمَ هَٰهُنَا حَمِيمٌۭ ﴿35﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

"अतः आज उसका यहाँ कोई घनिष्ट मित्र नहीं,

وَلَا طَعَامٌ إِلَّا مِنْ غِسْلِينٍۢ ﴿36﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और न ही धोवन के सिवा कोई भोजन है,

لَّا يَأْكُلُهُۥٓ إِلَّا ٱلْخَٰطِـُٔونَ ﴿37﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

"उसे ख़ताकारों (अपराधियों) के अतिरिक्त कोई नहीं खाता।"

فَلَآ أُقْسِمُ بِمَا تُبْصِرُونَ ﴿38﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

अतः कुछ नहीं! मैं क़सम खाता हूँ उन चीज़ों की जो तुम देखते

وَمَا لَا تُبْصِرُونَ ﴿39﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

हो और उन चीज़ों को भी जो तुम नहीं देखते,

إِنَّهُۥ لَقَوْلُ رَسُولٍۢ كَرِيمٍۢ ﴿40﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

निश्चय ही वह एक प्रतिष्ठित रसूल की लाई हुई वाणी है

وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَاعِرٍۢ ۚ قَلِيلًۭا مَّا تُؤْمِنُونَ ﴿41﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

वह किसी कवि की वाणी नहीं। तुम ईमान थोड़े ही लाते हो

وَلَا بِقَوْلِ كَاهِنٍۢ ۚ قَلِيلًۭا مَّا تَذَكَّرُونَ ﴿42﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और न वह किसी काहिन का वाणी है। तुम होश से थोड़े ही काम लेते हो

تَنزِيلٌۭ مِّن رَّبِّ ٱلْعَٰلَمِينَ ﴿43﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

अवतरण है सारे संसार के रब की ओर से,

وَلَوْ تَقَوَّلَ عَلَيْنَا بَعْضَ ٱلْأَقَاوِيلِ ﴿44﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

यदि वह (नबी) हमपर थोपकर कुछ बातें घड़ता,

لَأَخَذْنَا مِنْهُ بِٱلْيَمِينِ ﴿45﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

तो अवश्य हम उसका दाहिना हाथ पकड़ लेते,

ثُمَّ لَقَطَعْنَا مِنْهُ ٱلْوَتِينَ ﴿46﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

फिर उसकी गर्दन की रग काट देते,

فَمَا مِنكُم مِّنْ أَحَدٍ عَنْهُ حَٰجِزِينَ ﴿47﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और तुममें से कोई भी इससे रोकनेवाला न होता

وَإِنَّهُۥ لَتَذْكِرَةٌۭ لِّلْمُتَّقِينَ ﴿48﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और निश्चय ही वह एक अनुस्मृति है डर रखनेवालों के लिए

وَإِنَّا لَنَعْلَمُ أَنَّ مِنكُم مُّكَذِّبِينَ ﴿49﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और निश्चय ही हम जानते है कि तुममें कितने ही ऐसे है जो झुठलाते है

وَإِنَّهُۥ لَحَسْرَةٌ عَلَى ٱلْكَٰفِرِينَ ﴿50﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

निश्चय ही वह इनकार करनेवालों के लिए सर्वथा पछतावा है,

وَإِنَّهُۥ لَحَقُّ ٱلْيَقِينِ ﴿51﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

और वह बिल्कुल विश्वसनीय सत्य है।

فَسَبِّحْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلْعَظِيمِ ﴿52﴾

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

अतः तुम अपने महिमावान रब के नाम की तसबीह (गुणगान) करो

Quran recitationReady
Open audio