بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ عَمَّ يَتَسَآءَلُونَ ﴿1﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
वे आपस में किस चीज़ के विषय में प्रश्न कर रहे हैं?
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
किस चीज़ के विषय में वे आपस में पूछ-गच्छ कर रहे है?
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
ये लोग आपस में किस चीज़ का हाल पूछते हैं
عَنِ ٱلنَّبَإِ ٱلْعَظِيمِ ﴿2﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
बहुत बड़ी सूचना के विषय में।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
उस बड़ी ख़बर के सम्बन्ध में,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
एक बड़ी ख़बर का हाल
ٱلَّذِى هُمْ فِيهِ مُخْتَلِفُونَ ﴿3﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
जिसमें वे मतभेद करने वाले हैं।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
जिसमें वे मतभेद रखते है
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
जिसमें लोग एख्तेलाफ कर रहे हैं
كَلَّا سَيَعْلَمُونَ ﴿4﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
हरगिज़ नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
कदापि नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे।
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
देखो उन्हें अनक़रीब ही मालूम हो जाएगा
ثُمَّ كَلَّا سَيَعْلَمُونَ ﴿5﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
फिर हरगिज़ नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे।[1]
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
फिर कदापि नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे।
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
फिर इन्हें अनक़रीब ही ज़रूर मालूम हो जाएगा
أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ مِهَٰدًۭا ﴿6﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
क्या हमने धरती को बिछौना नहीं बनाया?
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
क्या ऐसा नहीं है कि हमने धरती को बिछौना बनाया
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
क्या हमने ज़मीन को बिछौना
وَٱلْجِبَالَ أَوْتَادًۭا ﴿7﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
और पर्वतों को मेखें?
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
और पहाड़ों को मेख़े?
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
और पहाड़ों को (ज़मीन) की मेख़े नहीं बनाया
وَخَلَقْنَٰكُمْ أَزْوَٰجًۭا ﴿8﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
तथा हमने तुम्हें जोड़े-जोड़े पैदा किया।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
और हमने तुम्हें जोड़-जोड़े पैदा किया,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
और हमने तुम लोगों को जोड़ा जोड़ा पैदा किया
وَجَعَلْنَا نَوْمَكُمْ سُبَاتًۭا ﴿9﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
तथा हमने तुम्हारी नींद को आराम (का साधन) बनाया।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
और तुम्हारी नींद को थकन दूर करनेवाली बनाया,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
और तुम्हारी नींद को आराम (का बाइस) क़रार दिया
وَجَعَلْنَا ٱلَّيْلَ لِبَاسًۭا ﴿10﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
और हमने रात को आवरण बनाया।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
रात को आवरण बनाया,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
और रात को परदा बनाया
وَجَعَلْنَا ٱلنَّهَارَ مَعَاشًۭا ﴿11﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
और हमने दिन को कमाने के लिए बनाया।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
और दिन को जीवन-वृति के लिए बनाया
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
और हम ही ने दिन को (कसब) मआश (का वक्त) बनाया
وَبَنَيْنَا فَوْقَكُمْ سَبْعًۭا شِدَادًۭا ﴿12﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
तथा हमने तुम्हारे ऊपर सात मज़बूत (आकाश) बनाए।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
और तुम्हारे ऊपर सात सुदृढ़ आकाश निर्मित किए,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
और तुम्हारे ऊपर सात मज़बूत (आसमान) बनाए
وَجَعَلْنَا سِرَاجًۭا وَهَّاجًۭا ﴿13﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
और हमने एक प्रकाशमान् तप्त दीप (सूर्य) बनाया।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
और एक तप्त और प्रकाशमान प्रदीप बनाया,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
और हम ही ने (सूरज) को रौशन चिराग़ बनाया
وَأَنزَلْنَا مِنَ ٱلْمُعْصِرَٰتِ مَآءًۭ ثَجَّاجًۭا ﴿14﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
और हमने बदलियों से मूसलाधार पानी उतारा।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
और बरस पड़नेवाली घटाओं से हमने मूसलाधार पानी उतारा,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
और हम ही ने बादलों से मूसलाधार पानी बरसाया
لِّنُخْرِجَ بِهِۦ حَبًّۭا وَنَبَاتًۭا ﴿15﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
ताकि हम उसके द्वारा अन्न और वनस्पति उगाएँ।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
ताकि हम उसके द्वारा अनाज और वनस्पति उत्पादित करें
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
ताकि उसके ज़रिए से दाने और सबज़ी
وَجَنَّٰتٍ أَلْفَافًا ﴿16﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
और घने-घने बाग़।[2]
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
और सघन बांग़ भी।
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
और घने घने बाग़ पैदा करें
إِنَّ يَوْمَ ٱلْفَصْلِ كَانَ مِيقَٰتًۭا ﴿17﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
निःसंदेह निर्णय (फ़ैसले) का दिन एक नियत समय है।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
निस्संदेह फ़ैसले का दिन एक नियत समय है,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
बेशक फैसले का दिन मुक़र्रर है
يَوْمَ يُنفَخُ فِى ٱلصُّورِ فَتَأْتُونَ أَفْوَاجًۭا ﴿18﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
जिस दिन सूर में फूँक मारी जाएगी, तो तुम दल के दल चले आओगे।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
जिस दिन नरसिंघा में फूँक मारी जाएगी, तो तुम गिरोह को गिरोह चले आओगे।
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
जिस दिन सूर फूँका जाएगा और तुम लोग गिरोह गिरोह हाज़िर होगे
وَفُتِحَتِ ٱلسَّمَآءُ فَكَانَتْ أَبْوَٰبًۭا ﴿19﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
और आकाश खोल दिया जाएगा, तो उसमें द्वार ही द्वार हो जाएँगे।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
और आकाश खोल दिया जाएगा तो द्वार ही द्वार हो जाएँगे;
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
और आसमान खोल दिए जाएँगे
وَسُيِّرَتِ ٱلْجِبَالُ فَكَانَتْ سَرَابًا ﴿20﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
और पर्वत चलाए जाएँगे, तो वे मरीचिका बन जाएँगे।[3]
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
और पहाड़ चलाए जाएँगे, तो वे बिल्कुल मरीचिका होकर रह जाएँगे
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
तो (उसमें) दरवाज़े हो जाएँगे और पहाड़ (अपनी जगह से) चलाए जाएँगे तो रेत होकर रह जाएँगे
إِنَّ جَهَنَّمَ كَانَتْ مِرْصَادًۭا ﴿21﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
निःसंदेह जहन्नम घात में है।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
वास्तव में जहन्नम एक घात-स्थल है;
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
बेशक जहन्नुम घात में है
لِّلطَّٰغِينَ مَـَٔابًۭا ﴿22﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
सरकशों का ठिकाना है।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
सरकशों का ठिकाना है
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
सरकशों का (वही) ठिकाना है
لَّٰبِثِينَ فِيهَآ أَحْقَابًۭا ﴿23﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
जिसमें वे अनगिनत वर्षों तक रहेंगे।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
वस्तुस्थिति यह है कि वे उसमें मुद्दत पर मुद्दत बिताते रहेंगे
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
उसमें मुद्दतों पड़े झींकते रहेंगें
لَّا يَذُوقُونَ فِيهَا بَرْدًۭا وَلَا شَرَابًا ﴿24﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
वे उसमें न कोई ठंड चखेंगे और न पीने की चीज़।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
वे उसमे न किसी शीतलता का मज़ा चखेगे और न किसी पेय का,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
न वहाँ ठन्डक का मज़ा चखेंगे और न खौलते हुए पानी
إِلَّا حَمِيمًۭا وَغَسَّاقًۭا ﴿25﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
सिवाय अत्यंत गर्म पानी और बहती पीप के।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
सिवाय खौलते पानी और बहती पीप-रक्त के
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
और बहती हुई पीप के सिवा कुछ पीने को मिलेगा
جَزَآءًۭ وِفَاقًا ﴿26﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
यह पूरा-पूरा बदला है।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
यह बदले के रूप में उनके कर्मों के ठीक अनुकूल होगा
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
(ये उनकी कारस्तानियों का) पूरा पूरा बदला है
إِنَّهُمْ كَانُوا۟ لَا يَرْجُونَ حِسَابًۭا ﴿27﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
निःसंदेह वे हिसाब से नहीं डरते थे।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
वास्तव में किसी हिसाब की आशा न रखते थे,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
बेशक ये लोग आख़ेरत के हिसाब की उम्मीद ही न रखते थे
وَكَذَّبُوا۟ بِـَٔايَٰتِنَا كِذَّابًۭا ﴿28﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
तथा उन्होंने हमारी आयतों को बुरी तरह झुठलाया।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
और उन्होंने हमारी आयतों को ख़ूब झुठलाया,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
और इन लोगो हमारी आयतों को बुरी तरह झुठलाया
وَكُلَّ شَىْءٍ أَحْصَيْنَٰهُ كِتَٰبًۭا ﴿29﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
और हमने हर चीज़ को लिखकर संरक्षित कर रखा है।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
और हमने हर चीज़ लिखकर गिन रखी है
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
और हमने हर चीज़ को लिख कर मनज़बत कर रखा है
فَذُوقُوا۟ فَلَن نَّزِيدَكُمْ إِلَّا عَذَابًا ﴿30﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
तो चखो, हम तुम्हारे लिए यातना ही अधिक करते रहेंगे।[4]
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
"अब चखो मज़ा कि यातना के अतिरिक्त हम तुम्हारे लिए किसी और चीज़ में बढ़ोत्तरी नहीं करेंगे। "
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
तो अब तुम मज़ा चखो हमतो तुम पर अज़ाब ही बढ़ाते जाएँगे
إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ مَفَازًا ﴿31﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
निःसंदेह (अल्लाह से) डरने वालों के लिए सफलता है।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
निस्सदेह डर रखनेवालों के लिए एक बड़ी सफलता है,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
बेशक परहेज़गारों के लिए बड़ी कामयाबी है
حَدَآئِقَ وَأَعْنَٰبًۭا ﴿32﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
बाग़ तथा अंगूर।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
बाग़ है और अंगूर,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
(यानि बेहश्त के) बाग़ और अंगूर
وَكَوَاعِبَ أَتْرَابًۭا ﴿33﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
और समान उम्र वाली नवयुवतियाँ।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
और नवयौवना समान उम्रवाली,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
और वह औरतें जिनकी उठती हुई जवानियाँ
وَكَأْسًۭا دِهَاقًۭا ﴿34﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
और छलकते हुए प्याले।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
और छलक़ता जाम
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
और बाहम हमजोलियाँ हैं और शराब के लबरेज़ साग़र
لَّا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًۭا وَلَا كِذَّٰبًۭا ﴿35﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
वे उसमें न तो कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न (एक दूसरे को) झुठलाना।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
वे उसमें न तो कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न कोई झुठलाने की बात
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
और शराब के लबरेज़ साग़र वहाँ न बेहूदा बात सुनेंगे और न झूठ
جَزَآءًۭ مِّن رَّبِّكَ عَطَآءً حِسَابًۭا ﴿36﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
यह तुम्हारे पालनहार की ओर से बदले में ऐसा प्रदान है जो पर्याप्त होगा।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
यह तुम्हारे रब की ओर से बदला होगा, हिसाब के अनुसार प्रदत्त
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
(ये) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से काफ़ी इनाम और सिला है
رَّبِّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ٱلرَّحْمَٰنِ ۖ لَا يَمْلِكُونَ مِنْهُ خِطَابًۭا ﴿37﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
जो आकाशों और धरती तथा उनके बीच की हर चीज़ का पालनहार है, अत्यंत दयावान् है। उससे बात करने का उन्हें अधिकार नहीं होगा।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
वह आकाशों और धरती का और जो कुछ उनके बीच है सबका रब है, अत्यन्त कृपाशील है, उसके सामने बात करना उनके बस में नहीं होगा
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
जो सारे आसमान और ज़मीन और जो इन दोनों के बीच में है सबका मालिक है बड़ा मेहरबान लोगों को उससे बात का पूरा न होगा
يَوْمَ يَقُومُ ٱلرُّوحُ وَٱلْمَلَٰٓئِكَةُ صَفًّۭا ۖ لَّا يَتَكَلَّمُونَ إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ ٱلرَّحْمَٰنُ وَقَالَ صَوَابًۭا ﴿38﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
जिस दिन रूह़ (जिबरील) तथा फ़रिश्ते पंक्तियों में खड़े होंगे, उससे केवल वही बात कर सकेगा जिसे रहमान (अल्लाह) आज्ञा देगा और वह ठीक बात कहेगा।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
जिस दिन रूह और फ़रिश्ते पक्तिबद्ध खड़े होंगे, वे बोलेंगे नहीं, सिवाय उस व्यक्ति के जिसे रहमान अनुमति दे और जो ठीक बात कहे
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
जिस दिन जिबरील और फरिश्ते (उसके सामने) पर बाँध कर खड़े होंगे (उस दिन) उससे कोई बात न कर सकेगा मगर जिसे ख़ुदा इजाज़त दे और वह ठिकाने की बात कहे
ذَٰلِكَ ٱلْيَوْمُ ٱلْحَقُّ ۖ فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ مَـَٔابًا ﴿39﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
यही (वह) दिन है जो सत्य है। अतः जो चाहे अपने पालनहार की ओर लौटने की जगह (ठिकाना) बना ले।[5]
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
वह दिन सत्य है। अब जो कोई चाहे अपने रब की ओर रुज करे
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
वह दिन बरहक़ है तो जो शख़्श चाहे अपने परवरदिगार की बारगाह में (अपना) ठिकाना बनाए
إِنَّآ أَنذَرْنَٰكُمْ عَذَابًۭا قَرِيبًۭا يَوْمَ يَنظُرُ ٱلْمَرْءُ مَا قَدَّمَتْ يَدَاهُ وَيَقُولُ ٱلْكَافِرُ يَٰلَيْتَنِى كُنتُ تُرَٰبًۢا ﴿40﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
निःसंदेह हमने तुम्हें एक निकट ही आने वाली यातना से डरा दिया है, जिस दिन मनुष्य देख लेगा, जो कुछ उसके दोनों हाथों ने आगे भेजा है, और काफिर कहेगा : ऐ काश कि मैं मिट्टी होता![6]
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
हमने तुम्हें निकट आ लगी यातना से सावधान कर दिया है। जिस दिन मनुष्य देख लेगा जो कुछ उसके हाथों ने आगे भेजा, और इनकार करनेवाला कहेगा, "ऐ काश! कि मैं मिट्टी होता!"
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
हमने तुम लोगों को अनक़रीब आने वाले अज़ाब से डरा दिया जिस दिन आदमी अपने हाथों पहले से भेजे हुए (आमाल) को देखेगा और काफ़िर कहेगा काश मैं ख़ाक हो जाता