بِّسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلتِّينِ وَٱلزَّيْتُونِ ﴿1﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
क़सम है अंजीर की! तथा ज़ैतून की!
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
साक्षी है तीन और ज़ैतून
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
इन्जीर और ज़ैतून की क़सम
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بِّسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلتِّينِ وَٱلزَّيْتُونِ ﴿1﴾
क़सम है अंजीर की! तथा ज़ैतून की!
साक्षी है तीन और ज़ैतून
इन्जीर और ज़ैतून की क़सम
وَطُورِ سِينِينَ ﴿2﴾
एवं "तूरे सीनीन" की क़सम!
और तूर सीनीन,
और तूर सीनीन की
وَهَٰذَا ٱلْبَلَدِ ٱلْأَمِينِ ﴿3﴾
और इस शान्ति वाले नगर की क़सम!
और यह शान्तिपूर्ण भूमि (मक्का)
और उस अमन वाले शहर (मक्का) की
لَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَٰنَ فِىٓ أَحْسَنِ تَقْوِيمٍۢ ﴿4﴾
निःसंदेह हमने इनसान को सबसे अच्छी संरचना में पैदा किया है।
निस्संदेह हमने मनुष्य को सर्वोत्तम संरचना के साथ पैदा किया
कि हमने इन्सान बहुत अच्छे कैड़े का पैदा किया
ثُمَّ رَدَدْنَٰهُ أَسْفَلَ سَٰفِلِينَ ﴿5﴾
फिर हमने उसे सबसे नीची हालत की ओर लौटा दिया।
फिर हमने उसे निकृष्टतम दशा की ओर लौटा दिया, जबकि वह स्वयं गिरनेवाला बना
फिर हमने उसे (बूढ़ा करके रफ्ता रफ्ता) पस्त से पस्त हालत की तरफ फेर दिया
إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ فَلَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍۢ ﴿6﴾
परंतु जो लोग ईमान लाए तथा उन्होंने सत्कर्म किए, उनके लिए समाप्त न होने वाला बदला है।
सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए और जिन्होंने अच्छे कर्म किए, तो उनके लिए कभी न समाप्त होनेवाला बदला है
मगर जो लोग ईमान लाए और अच्छे (अच्छे) काम करते रहे उनके लिए तो बे इन्तेहा अज्र व सवाब है
فَمَا يُكَذِّبُكَ بَعْدُ بِٱلدِّينِ ﴿7﴾
फिर (ऐ मनुष्य) तुझे कौन-सी चीज़ बदले (के दिन) को झुठलाने पर आमादा करती है?
अब इसके बाद क्या है, जो बदले के विषय में तुम्हें झुठलाए?
तो (ऐ रसूल) इन दलीलों के बाद तुमको (रोज़े) जज़ा के बारे में कौन झुठला सकता है
أَلَيْسَ ٱللَّهُ بِأَحْكَمِ ٱلْحَٰكِمِينَ ﴿8﴾
क्या अल्लाह सब हाकिमों से बड़ा हाकिम नहीं है?
क्या अल्लाह सब हाकिमों से बड़ा हाकिम नहीं हैं?
क्या ख़ुदा सबसे बड़ा हाकिम नहीं है (हाँ ज़रूर है)