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Translation comparison Compare Nuh Quran translations Compare up to three verified translation editions verse by verse, including editions in two different languages.
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ إِنَّآ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِۦٓ أَنْ أَنذِرْ قَوْمَكَ مِن قَبْلِ أَن يَأْتِيَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌۭ ﴿1﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari निःसंदेह हमने नूह़ को उनकी जाति की ओर भेजा कि अपनी जाति को सावधान कर दो, इससे पहले कि उनके पास दर्दनाक यातना आ जाए।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद हमने नूह को उसकी कौ़म की ओर भेजा कि "अपनी क़ौम के लोगों को सावधान कर दो, इससे पहले कि उनपर कोई दुखद यातना आ जाए।"
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी हमने नूह को उसकी क़ौम के पास (पैग़म्बर बनाकर) भेजा कि क़ब्ल उसके कि उनकी क़ौम पर दर्दनाक अज़ाब आए उनको उससे डराओ
قَالَ يَٰقَوْمِ إِنِّى لَكُمْ نَذِيرٌۭ مُّبِينٌ ﴿2﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! निःसंदेह मैं तुम्हें स्पष्ट रूप से डराने वाला हूँ।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! मैं तुम्हारे लिए एक स्पष्ट सचेतकर्ता हूँ
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी तो नूह (अपनी क़ौम से) कहने लगे ऐ मेरी क़ौम मैं तो तुम्हें साफ़ साफ़ डराता (और समझाता) हूँ
أَنِ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ وَٱتَّقُوهُ وَأَطِيعُونِ ﴿3﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari कि अल्लाह की इबादत करो तथा उससे डरो और मेरी बात मानो।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद कि अल्लाह की बन्दगी करो और उसका डर रखो और मेरी आज्ञा मानो।-
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी कि तुम लोग ख़ुदा की इबादत करो और उसी से डरो और मेरी इताअत करो
يَغْفِرْ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمْ وَيُؤَخِّرْكُمْ إِلَىٰٓ أَجَلٍۢ مُّسَمًّى ۚ إِنَّ أَجَلَ ٱللَّهِ إِذَا جَآءَ لَا يُؤَخَّرُ ۖ لَوْ كُنتُمْ تَعْلَمُونَ ﴿4﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari वह तुम्हारे लिए तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा तथा तुम्हें एक निर्धारित समय[1] तक मोहलत देगा। निश्चय जब अल्लाह का निर्धारित समय आ जाता है, तो वह टाला नहीं जाता, काश कि तुम जानते होते।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद "वह तुम्हें क्षमा करके तुम्हारे गुनाहों से तुम्हें पाक कर देगा और एक निश्चित समय तक तुम्हे मुहल्लत देगा। निश्चय ही जब अल्लाह का निश्चित समय आ जाता है तो वह टलता नहीं, काश कि तुम जानते!"
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी ख़ुदा तुम्हारे गुनाह बख्श देगा और तुम्हें (मौत के) मुक़र्रर वक्त तक बाक़ी रखेगा, बेशक जब ख़ुदा का मुक़र्रर किया हुआ वक्त अा जाता है तो पीछे हटाया नहीं जा सकता अगर तुम समझते होते
قَالَ رَبِّ إِنِّى دَعَوْتُ قَوْمِى لَيْلًۭا وَنَهَارًۭا ﴿5﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari उसने कहा : ऐ मेरे रब! निःसंदेह मैंने अपनी जाति को रात-दिन बुलाया।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद उसने कहा, "ऐ मेरे रब! मैंने अपनी क़ौम के लोगों को रात और दिन बुलाया
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी (जब लोगों ने न माना तो) अर्ज़ की परवरदिगार मैं अपनी क़ौम को (ईमान की तरफ) बुलाता रहा
فَلَمْ يَزِدْهُمْ دُعَآءِىٓ إِلَّا فِرَارًۭا ﴿6﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari तो मेरे बुलाने से ये लोग और ज़्यादा भागने लगे।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद "किन्तु मेरी पुकार ने उनके पलायन को ही बढ़ाया
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी लेकिन वह मेरे बुलाने से और ज्यादा गुरेज़ ही करते रहे
وَإِنِّى كُلَّمَا دَعَوْتُهُمْ لِتَغْفِرَ لَهُمْ جَعَلُوٓا۟ أَصَٰبِعَهُمْ فِىٓ ءَاذَانِهِمْ وَٱسْتَغْشَوْا۟ ثِيَابَهُمْ وَأَصَرُّوا۟ وَٱسْتَكْبَرُوا۟ ٱسْتِكْبَارًۭا ﴿7﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari और निःसंदेह मैंने जब भी उन्हें बुलाया, ताकि तू उन्हें क्षमा कर दे, तो उन्होंने अपनी उँगलियाँ अपने कानों में डाल लीं तथा अपने कपड़े ओढ़ लिए[2] और हठ दिखाया और बड़ा घमंड किया।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद "और जब भी मैंने उन्हें बुलाया, ताकि तू उन्हें क्षमा कर दे, तो उन्होंने अपने कानों में अपनी उँगलियाँ दे लीं और अपने कपड़ो से स्वयं को ढाँक लिया और अपनी हठ पर अड़ गए और बड़ा ही घमंड किया
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी और मैने जब उनको बुलाया कि (ये तौबा करें और) तू उन्हें माफ कर दे तो उन्होने अपने कानों में उंगलियां दे लीं और मुझसे छिपने को कपड़े ओढ़ लिए और अड़ गए और बहुत शिद्दत से अकड़ बैठे
ثُمَّ إِنِّى دَعَوْتُهُمْ جِهَارًۭا ﴿8﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari फिर निःसंदेह मैंने उन्हें खुल्ल-मखुल्ला बुलाया।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद "फिर मैंने उन्हें खुल्लमखुल्ला बुलाया,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी फिर मैंने उनको बिल एलान बुलाया फिर उनको ज़ाहिर ब ज़ाहिर समझाया
ثُمَّ إِنِّىٓ أَعْلَنتُ لَهُمْ وَأَسْرَرْتُ لَهُمْ إِسْرَارًۭا ﴿9﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari फिर निःसंदेह मैंने उन्हें उच्च स्वर में आमंत्रित किया और मैंने उन्हें चुपके-चुपके (भी) समझाया।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद "फिर मैंने उनसे खुले तौर पर भी बातें की और उनसे चुपके-चुपके भी बातें की
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी और उनकी पोशीदा भी फ़हमाईश की कि मैंने उनसे कहा
فَقُلْتُ ٱسْتَغْفِرُوا۟ رَبَّكُمْ إِنَّهُۥ كَانَ غَفَّارًۭا ﴿10﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari तो मैंने कहा : अपने पालनहार से क्षमा माँगो। निःसंदेह वह बहुत क्षमा करने वाला है।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद "और मैंने कहा, अपने रब से क्षमा की प्रार्थना करो। निश्चय ही वह बड़ा क्षमाशील है,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी अपने परवरदिगार से मग़फेरत की दुआ माँगो बेशक वह बड़ा बख्शने वाला है
يُرْسِلِ ٱلسَّمَآءَ عَلَيْكُم مِّدْرَارًۭا ﴿11﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari वह तुम पर मूसलाधार बारिश बरसाएगा।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद "वह बादल भेजेगा तुमपर ख़ूब बरसनेवाला,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी (और) तुम पर आसमान से मूसलाधार पानी बरसाएगा
وَيُمْدِدْكُم بِأَمْوَٰلٍۢ وَبَنِينَ وَيَجْعَل لَّكُمْ جَنَّٰتٍۢ وَيَجْعَل لَّكُمْ أَنْهَٰرًۭا ﴿12﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari और वह तुम्हें धन और बच्चों में वृद्धि प्रदान करेगा तथा तुम्हारे लिए बाग़ बना देगा और तुम्हारे लिए नहरें निकाल देगा।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद "और वह माल और बेटों से तुम्हें बढ़ोतरी प्रदान करेगा, और तुम्हारे लिए बाग़ पैदा करेगा और तुम्हारे लिए नहरें प्रवाहित करेगा
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी और माल और औलाद में तरक्क़ी देगा, और तुम्हारे लिए बाग़ बनाएगा, और तुम्हारे लिए नहरें जारी करेगा
مَّا لَكُمْ لَا تَرْجُونَ لِلَّهِ وَقَارًۭا ﴿13﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari तुम्हें क्या हो गया है कि तुम अल्लाह की महिमा से नहीं डरते?
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद "तुम्हें क्या हो गया है कि तुम (अपने दिलों में) अल्लाह के लिए किसी गौरव की आशा नहीं रखते?
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी तुम्हें क्या हो गया है कि तुम ख़ुदा की अज़मत का ज़रा भी ख्याल नहीं करते
وَقَدْ خَلَقَكُمْ أَطْوَارًا ﴿14﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari हालाँकि उसने तुम्हें विभिन्न चरणों[3] में पैदा किया है।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद "हालाँकि उसने तुम्हें विभिन्न अवस्थाओं से गुज़ारते हुए पैदा किया
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी हालॉकि उसी ने तुमको तरह तरह का पैदा किया
أَلَمْ تَرَوْا۟ كَيْفَ خَلَقَ ٱللَّهُ سَبْعَ سَمَٰوَٰتٍۢ طِبَاقًۭا ﴿15﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari क्या तुमने देखा नहीं कि अल्लाह ने किस तरह ऊपर-तले सात आकाश बनाए?
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद "क्या तुमने देखा नहीं कि अल्लाह ने किस प्रकार ऊपर तले सात आकाश बनाए,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी क्या तुमने ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा ने सात आसमान ऊपर तलें क्यों कर बनाए
وَجَعَلَ ٱلْقَمَرَ فِيهِنَّ نُورًۭا وَجَعَلَ ٱلشَّمْسَ سِرَاجًۭا ﴿16﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari और उसने उनमें चाँद को प्रकाश बनाया और सूर्य को दीपक बनाया।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद "और उनमें चन्द्रमा को प्रकाश और सूर्य का प्रदीप बनाया?
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी और उसी ने उसमें चाँद को नूर बनाया और सूरज को रौशन चिराग़ बना दिया
وَٱللَّهُ أَنۢبَتَكُم مِّنَ ٱلْأَرْضِ نَبَاتًۭا ﴿17﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari और अल्लाह ही ने तुम्हें धरती[4] से (विशेष ढंग से) उगाया।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद "और अल्लाह ने तुम्हें धरती से विशिष्ट प्रकार से विकसित किया,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी और ख़ुदा ही तुमको ज़मीन से पैदा किया
ثُمَّ يُعِيدُكُمْ فِيهَا وَيُخْرِجُكُمْ إِخْرَاجًۭا ﴿18﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari फिर वह तुम्हें उसी में वापस ले जाएगा और तुम्हें (उसी से) निकालेगा।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद "फिर वह तुम्हें उसमें लौटाता है और तुम्हें बाहर निकालेगा भी
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी फिर तुमको उसी में दोबारा ले जाएगा और (क़यामत में उसी से) निकाल कर खड़ा करेगा
وَٱللَّهُ جَعَلَ لَكُمُ ٱلْأَرْضَ بِسَاطًۭا ﴿19﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari और अल्लाह ने तुम्हारे लिए धरती को बिछौना बनाया।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद "और अल्लाह ने तुम्हारे लिए धरती को बिछौना बनाया,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी और ख़ुदा ही ने ज़मीन को तुम्हारे लिए फ़र्श बनाया
لِّتَسْلُكُوا۟ مِنْهَا سُبُلًۭا فِجَاجًۭا ﴿20﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari ताकि तुम उसके विस्तृत मार्गों पर चलो।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद "ताकि तुम उसके विस्तृत मार्गों पर चलो।"
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी ताकि तुम उसके बड़े बड़े कुशादा रास्तों में चलो फिरो
قَالَ نُوحٌۭ رَّبِّ إِنَّهُمْ عَصَوْنِى وَٱتَّبَعُوا۟ مَن لَّمْ يَزِدْهُ مَالُهُۥ وَوَلَدُهُۥٓ إِلَّا خَسَارًۭا ﴿21﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari नूह ने कहा : ऐ मेरे रब! निःसंदेह उन्होंने मेरी अवज्ञा की और उसका[5] अनुसरण किया, जिसके धन और संतान ने उसकी क्षति ही को बढ़ाया।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद नूह ने कहा, "ऐ मेरे रब! उन्होंने मेरी अवज्ञा की, और उसका अनुसरण किया जिसके धन और जिसकी सन्तान ने उसके घाटे ही मे अभिवृद्धि की
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी (फिर) नूह ने अर्ज़ की परवरदिगार इन लोगों ने मेरी नाफ़रमानी की उस शख़्श के ताबेदार बन के जिसने उनके माल और औलाद में नुक़सान के सिवा फ़ायदा न पहुँचाया
وَمَكَرُوا۟ مَكْرًۭا كُبَّارًۭا ﴿22﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari और उन्होंने बहुत बड़ी चाल चली।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद "और वे बहुत बड़ी चाल चले,
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी और उन्होंने (मेरे साथ) बड़ी मक्कारियाँ की
وَقَالُوا۟ لَا تَذَرُنَّ ءَالِهَتَكُمْ وَلَا تَذَرُنَّ وَدًّۭا وَلَا سُوَاعًۭا وَلَا يَغُوثَ وَيَعُوقَ وَنَسْرًۭا ﴿23﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari और उन्होंने कहा : तुम अपने पूज्यों को कदापि न छोड़ना, और न कभी वद्द को छोड़ना, और न सुवाअ को और न यग़ूस और यऊक़ तथा नस्र[6] को।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद "और उन्होंने कहा, अपने इष्ट-पूज्यों के कदापि न छोड़ो और न वह वद्द को छोड़ो और न सुवा को और न यग़ूस और न यऊक़ और नस्र को
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी और (उलटे) कहने लगे कि आपने माबूदों को हरगिज़ न छोड़ना और न वद को और सुआ को और न यगूस और यऊक़ व नस्र को छोड़ना
وَقَدْ أَضَلُّوا۟ كَثِيرًۭا ۖ وَلَا تَزِدِ ٱلظَّٰلِمِينَ إِلَّا ضَلَٰلًۭا ﴿24﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari और निश्चय उन्होंने बहुत-से लोगों को पथभ्रष्ट कर दिया। तथा तू अत्याचारियों की पथभ्रष्टता[7] ही में वृद्धि कर।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद "और उन्होंने बहुत-से लोगों को पथभ्रष्ट॥ किया है (तो तू उन्हें मार्ग न दिया) अब, तू भी ज़ालिमों की पथभ्रष्टता ही में अभिवृद्धि कर।"
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी और उन्होंने बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा और तू (उन) ज़ालिमों की गुमराही को और बढ़ा दे
مِّمَّا خَطِيٓـَٰٔتِهِمْ أُغْرِقُوا۟ فَأُدْخِلُوا۟ نَارًۭا فَلَمْ يَجِدُوا۟ لَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ أَنصَارًۭا ﴿25﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari वे अपने पापों के कारण डुबो[8] दिए गए, फिर जहन्नम में डाल दिए गए, तो उन्होंने अल्लाह के सिवा अपने लिए कोई मदद करने वाले नहीं पाए।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद वे अपनी बड़ी ख़ताओं के कारण पानी में डूबो दिए गए, फिर आग में दाख़िल कर दिए गए, फिर वे अपने और अल्लाह के बीच आड़ बननेवाले सहायक न पा सके
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी (आख़िर) वह अपने गुनाहों की बदौलत (पहले तो) डुबाए गए फिर जहन्नुम में झोंके गए तो उन लोगों ने ख़ुदा के सिवा किसी को अपना मददगार न पाया
وَقَالَ نُوحٌۭ رَّبِّ لَا تَذَرْ عَلَى ٱلْأَرْضِ مِنَ ٱلْكَٰفِرِينَ دَيَّارًا ﴿26﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari तथा नूह़ ने कहा : ऐ मेरे रब! धरती पर (इन) काफ़िरों में से कोई रहने वाला न छोड़।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद और नूह ने कहा, "ऐ मेरे रब! धरती पर इनकार करनेवालों में से किसी बसनेवाले को न छोड
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी और नूह ने अर्ज़ की परवरदिगार (इन) काफ़िरों में रूए ज़मीन पर किसी को बसा हुआ न रहने दे
إِنَّكَ إِن تَذَرْهُمْ يُضِلُّوا۟ عِبَادَكَ وَلَا يَلِدُوٓا۟ إِلَّا فَاجِرًۭا كَفَّارًۭا ﴿27﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari निःसंदेह यदि तू उन्हें छोड़े रखेगा, तो वे तेरे बंदों को पथभ्रष्ट करेंगे और दुराचारी एवं सख़्त काफ़िर ही को जन्म देंगे।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद "यदि तू उन्हें छोड़ देगा तो वे तेरे बन्दों को पथभ्रष्ट कर देंगे और वे दुराचारियों और बड़े अधर्मियों को ही जन्म देंगे
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी क्योंकि अगर तू उनको छोड़ देगा तो ये (फिर) तेरे बन्दों को गुमराह करेंगे और उनकी औलाद भी गुनाहगार और कट्टी काफिर ही होगी
رَّبِّ ٱغْفِرْ لِى وَلِوَٰلِدَىَّ وَلِمَن دَخَلَ بَيْتِىَ مُؤْمِنًۭا وَلِلْمُؤْمِنِينَ وَٱلْمُؤْمِنَٰتِ وَلَا تَزِدِ ٱلظَّٰلِمِينَ إِلَّا تَبَارًۢا ﴿28﴾
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari ऐ मेरे पालनहार! मुझे क्षमा करे दे, तथा मेरे माता-पिता को, और (हर) उस व्यक्ति को जो मेरे घर में मोमिन बन कर प्रवेश करे, तथा ईमान वाले पुरुषों और ईमान वाली स्त्रियों को। और अत्याचारियों को विनाश के सिवाय किसी चीज़ में न बढ़ा।
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद "ऐ मेरे रब! मुझे क्षमा कर दे और मेरे माँ-बाप को भी और हर उस व्यक्ति को भी जो मेरे घर में ईमानवाला बन कर दाख़िल हुआ और (सामान्य) ईमानवाले पुरुषों और ईमानवाली स्त्रियों को भी (क्षमा कर दे), और ज़ालिमों के विनाश को ही बढ़ा।"
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी परवरदिगार मुझको और मेरे माँ बाप को और जो मोमिन मेरे घर में आए उनको और तमाम ईमानदार मर्दों और मोमिन औरतों को बख्श दे और (इन) ज़ालिमों की बस तबाही को और ज्यादा कर