بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ نٓ ۚ وَٱلْقَلَمِ وَمَا يَسْطُرُونَ
नून। क़सम है क़लम की तथा उसकी[1] जो वे लिखते हैं।
The Pen · 52 verses · Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari.
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بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ نٓ ۚ وَٱلْقَلَمِ وَمَا يَسْطُرُونَ
नून। क़सम है क़लम की तथा उसकी[1] जो वे लिखते हैं।
مَآ أَنتَ بِنِعْمَةِ رَبِّكَ بِمَجْنُونٍۢ
आप, अपने रब के अनुग्रह से हरगिज़ दीवाना नहीं हैं।
وَإِنَّ لَكَ لَأَجْرًا غَيْرَ مَمْنُونٍۢ
तथा निःसंदेह आपके लिए निश्चय ऐसा प्रतिफल है जो निर्बाध है।
وَإِنَّكَ لَعَلَىٰ خُلُقٍ عَظِيمٍۢ
तथा निःसंदेह निश्चय आप एक महान चरित्र पर हैं।
فَسَتُبْصِرُ وَيُبْصِرُونَ
अतः शीघ्र ही आप देख लेंगे तथा वे भी देख लेंगे।
بِأَييِّكُمُ ٱلْمَفْتُونُ
कि तुममें से कौन पागलपन से ग्रसित है।
إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعْلَمُ بِمَن ضَلَّ عَن سَبِيلِهِۦ وَهُوَ أَعْلَمُ بِٱلْمُهْتَدِينَ
निःसंदेह आपका पालनहार ही उसे अधिक जानता है, जो उसकी राह से भटक गया तथा वही अधिक जानता है उन्हें, जो सीधे मार्ग पर हैं।
فَلَا تُطِعِ ٱلْمُكَذِّبِينَ
अतः आप झुठलाने वालों की बात न मानें।
وَدُّوا۟ لَوْ تُدْهِنُ فَيُدْهِنُونَ
वे चाहते हैं काश! आप नरमी करें, तो वे भी नरमी[2] करें।
وَلَا تُطِعْ كُلَّ حَلَّافٍۢ مَّهِينٍ
और आप किसी बहुत क़समें खाने वाले, हीन व्यक्ति की बात न मानें।[3]
هَمَّازٍۢ مَّشَّآءٍۭ بِنَمِيمٍۢ
जो बहुत ग़ीबत करने वाला, चुग़ली में बहुत दौड़-धूप करने वाला है।
مَّنَّاعٍۢ لِّلْخَيْرِ مُعْتَدٍ أَثِيمٍ
भलाई को बहुत रोकने वाला, हद से बढ़ने वाला, घोर पापी है।
عُتُلٍّۭ بَعْدَ ذَٰلِكَ زَنِيمٍ
क्रूर है, इसके उपरांत हरामज़ादा (वर्णसंकर) है।
أَن كَانَ ذَا مَالٍۢ وَبَنِينَ
इस कारण कि वह धन और बेटों वाला है।
إِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِ ءَايَٰتُنَا قَالَ أَسَٰطِيرُ ٱلْأَوَّلِينَ
जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं, तो कहता है : यह पहले लोगों की (कल्पित) कहानियाँ हैं।
سَنَسِمُهُۥ عَلَى ٱلْخُرْطُومِ
शीघ्र ही हम उसकी थूथन[4] पर दाग़ लगाएँगे।
إِنَّا بَلَوْنَٰهُمْ كَمَا بَلَوْنَآ أَصْحَٰبَ ٱلْجَنَّةِ إِذْ أَقْسَمُوا۟ لَيَصْرِمُنَّهَا مُصْبِحِينَ
निःसंदेह हमने उन्हें परीक्षा में डाला[5] है, जिस प्रकार बाग़ वालों को परीक्षा में डाला था, जब उन्होंने क़सम खाई कि भोर होते ही उसके फल अवश्य तोड़ लेंगे।
وَلَا يَسْتَثْنُونَ
और वे 'इन शा अल्लाह' नहीं कह रहे थे।
فَطَافَ عَلَيْهَا طَآئِفٌۭ مِّن رَّبِّكَ وَهُمْ نَآئِمُونَ
तो आपके पालनहार की ओर से उस (बाग़) पर एक यातना फिर गई, जबकि वे सोए हुए थे।
فَأَصْبَحَتْ كَٱلصَّرِيمِ
तो वह अंधेरी रात जैसा (काला) हो गया।
فَتَنَادَوْا۟ مُصْبِحِينَ
फिर उन्होंने भोर होते ही एक-दूसरे को पुकारा :
أَنِ ٱغْدُوا۟ عَلَىٰ حَرْثِكُمْ إِن كُنتُمْ صَٰرِمِينَ
कि अपने खेत पर सवेरे ही जा पहुँचो, यदि तुम फल तोड़ने वाले हो।
فَٱنطَلَقُوا۟ وَهُمْ يَتَخَٰفَتُونَ
चुनाँचे वे आपस में चुपके-चुपके बातें करते हुए चल दिए।
أَن لَّا يَدْخُلَنَّهَا ٱلْيَوْمَ عَلَيْكُم مِّسْكِينٌۭ
कि आज उस (बाग़) में तुम्हारे पास कोई निर्धन[6] हरगिज़ न आने पाए।
وَغَدَوْا۟ عَلَىٰ حَرْدٍۢ قَٰدِرِينَ
और वे सुबह-सुबह (यह सोचकर) निकले कि वे (निर्धनों को) रोकने में सक्षम हैं।
فَلَمَّا رَأَوْهَا قَالُوٓا۟ إِنَّا لَضَآلُّونَ
फिर जब उन्होंने उसे देखा, तो कहा : निःसंदेह हम निश्चय रास्ता भूल गए हैं।
بَلْ نَحْنُ مَحْرُومُونَ
बल्कि हम वंचित[7] कर दिए गए हैं।
قَالَ أَوْسَطُهُمْ أَلَمْ أَقُل لَّكُمْ لَوْلَا تُسَبِّحُونَ
उनमें से बेहतर ने कहा : क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि तुम (अल्लाह की) पवित्रता का वर्णन क्यों नहीं करते?
قَالُوا۟ سُبْحَٰنَ رَبِّنَآ إِنَّا كُنَّا ظَٰلِمِينَ
उन्होंने कहा : हमारा रब पवित्र है। निःसंदेह हम ही अत्याचारी थे।
فَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍۢ يَتَلَٰوَمُونَ
फिर वे आपस में एक दूसरे को दोष देने लगे।
قَالُوا۟ يَٰوَيْلَنَآ إِنَّا كُنَّا طَٰغِينَ
उन्होंने कहा : हाय हमारा विनाश! निश्चय हम ही सीमा का उल्लंघन करने वाले थे।
عَسَىٰ رَبُّنَآ أَن يُبْدِلَنَا خَيْرًۭا مِّنْهَآ إِنَّآ إِلَىٰ رَبِّنَا رَٰغِبُونَ
आशा है कि हमारा पालनहार हमें बदले में इस (बाग़) से बेहतर प्रदान करेगा। निश्चय हम अपने पालनहार ही की ओर इच्छा रखने वाले हैं।
كَذَٰلِكَ ٱلْعَذَابُ ۖ وَلَعَذَابُ ٱلْءَاخِرَةِ أَكْبَرُ ۚ لَوْ كَانُوا۟ يَعْلَمُونَ
इसी तरह होती है यातना, और आख़िरत की यातना तो इससे भी बड़ी है। काश वे जानते होते!
إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ عِندَ رَبِّهِمْ جَنَّٰتِ ٱلنَّعِيمِ
निःसंदेह डरने वालों के लिए उनके पालनहार के पास नेमत के बाग़ हैं।
أَفَنَجْعَلُ ٱلْمُسْلِمِينَ كَٱلْمُجْرِمِينَ
तो क्या हम आज्ञाकारियों[8] को अपराध करने वालों की तरह कर देंगे?
مَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ
तुम्हें क्या हुआ, तुम कैसे फ़ैसले करते हो?
أَمْ لَكُمْ كِتَٰبٌۭ فِيهِ تَدْرُسُونَ
क्या तुम्हारे पास कोई पुस्तक है, जिसमें तुम पढ़ते हो?
إِنَّ لَكُمْ فِيهِ لَمَا تَخَيَّرُونَ
(कि) निश्चय तुम्हारे लिए आख़िरत में वही होगा, जो तुम पसंद करोगे?
أَمْ لَكُمْ أَيْمَٰنٌ عَلَيْنَا بَٰلِغَةٌ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْقِيَٰمَةِ ۙ إِنَّ لَكُمْ لَمَا تَحْكُمُونَ
या तुम्हारे लिए हमारे ऊपर क़समें हैं, जो क़ियामत के दिन तक बाक़ी रहने वाली हैं कि तुम्हारे लिए निश्चय वही होगा, जो तुम निर्णय करोगे?
سَلْهُمْ أَيُّهُم بِذَٰلِكَ زَعِيمٌ
आप उनसे पूछिए कि उनमें से कौन इसकी ज़मानत लेता है?
أَمْ لَهُمْ شُرَكَآءُ فَلْيَأْتُوا۟ بِشُرَكَآئِهِمْ إِن كَانُوا۟ صَٰدِقِينَ
क्या उनके कोई साझी हैं? फिर तो वे अपने साझियों को ले आएँ[9], यदि वे सच्चे हैं।
يَوْمَ يُكْشَفُ عَن سَاقٍۢ وَيُدْعَوْنَ إِلَى ٱلسُّجُودِ فَلَا يَسْتَطِيعُونَ
जिस दिन पिंडली खोल दी जाएगी और वे सजदा करने के लिए बुलाए जाएँगे, तो वे सजदा नहीं कर सकेंगे।[10]
خَٰشِعَةً أَبْصَٰرُهُمْ تَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌۭ ۖ وَقَدْ كَانُوا۟ يُدْعَوْنَ إِلَى ٱلسُّجُودِ وَهُمْ سَٰلِمُونَ
उनकी आँखें झुकी होंगी, उनपर अपमान छाया होगा। हालाँकि उन्हें (संसार में) सजदे की ओर बुलाया जाता था, जबकि वे भले-चंगे थे।
فَذَرْنِى وَمَن يُكَذِّبُ بِهَٰذَا ٱلْحَدِيثِ ۖ سَنَسْتَدْرِجُهُم مِّنْ حَيْثُ لَا يَعْلَمُونَ
अतः आप मुझे तथा उसको छोड़ दें, जो इस वाणी (क़ुरआन) को झुठलाता है। हम उन्हें धीरे-धीरे (यातना की ओर) इस प्रकार ले जाएँगे[11] कि वे जान भी न सकेंगे।
وَأُمْلِى لَهُمْ ۚ إِنَّ كَيْدِى مَتِينٌ
और मैं उन्हें मोहलत (अवकाश) दूँगा।[12] निश्चय मेरा उपाय बड़ा मज़बूत है।
أَمْ تَسْـَٔلُهُمْ أَجْرًۭا فَهُم مِّن مَّغْرَمٍۢ مُّثْقَلُونَ
क्या आप उनसे कोई पारिश्रमिक[13] माँगते हैं कि वे तावान के बोझ से दबे जा रहे हैं?
أَمْ عِندَهُمُ ٱلْغَيْبُ فَهُمْ يَكْتُبُونَ
अथवा उनके पास परोक्ष (का ज्ञान) है, तो वे लिख[14] रहे हैं?
فَٱصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ وَلَا تَكُن كَصَاحِبِ ٱلْحُوتِ إِذْ نَادَىٰ وَهُوَ مَكْظُومٌۭ
अतः अपने पालनहार के निर्णय तक धैर्य रखें और मछली वाले के समान[15] न हो जाएँ, जब उसने (अल्लाह को) पुकारा, इस हाल में कि वह शोक से भरा हुआ था।
لَّوْلَآ أَن تَدَٰرَكَهُۥ نِعْمَةٌۭ مِّن رَّبِّهِۦ لَنُبِذَ بِٱلْعَرَآءِ وَهُوَ مَذْمُومٌۭ
और यदि उसके पालनहार की अनुकंपा ने उसे संभाल न लिया होता, तो निश्चय वह चटियल मैदान में इस दशा में फेंक दिया जाता कि वह निंदित होता।
فَٱجْتَبَٰهُ رَبُّهُۥ فَجَعَلَهُۥ مِنَ ٱلصَّٰلِحِينَ
फिर उसके पालनहार ने उसे चुन लिया और उसे सदाचारियों में से बना दिया।
وَإِن يَكَادُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَيُزْلِقُونَكَ بِأَبْصَٰرِهِمْ لَمَّا سَمِعُوا۟ ٱلذِّكْرَ وَيَقُولُونَ إِنَّهُۥ لَمَجْنُونٌۭ
और वे लोग जिन्होंने इनकार किया, निश्चय क़रीब हैं कि वे अपनी निगाहों से (घूर घूरकर) आपको अवश्य ही फिसला देंगे, जब वे क़ुरआन को सुनते हैं और कहते हैं कि यह अवश्य ही दीवाना है।
وَمَا هُوَ إِلَّا ذِكْرٌۭ لِّلْعَٰلَمِينَ
हालाँकि वह सर्व संसार के लिए मात्र एक उपदेश[16] है।