उत्तर- तौबाः यह अल्लाह की अवज्ञा से उसके आज्ञापालन की ओर लौटने को कहते हैं, अल्लाह तआला ने फ़रमाया है: (وَإِنِّي لَغَفَّارٌ لِّمَن تَابَ وَءَامَنَ وَعَمِلَ صَـٰلِحًا ثُمَّ ٱهۡتَدَىٰ) ''और मैं निश्चय ही बड़ा क्षमाशील हूँ उसके लिए, जिसने क्षमा याचना की तथा ईमान लाया और सदाचार किया फिर सुपथ पर रहा''। [सूरा ताहा: 82]
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