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जिस प्रकार अल्लाह अपने बन्दों को एक ही समय में जीविका प्रदान करता है, उसी प्रकार वह उन का हिसाब लेगा।
''और तुम्हें उत्पन्न करना और पुनः जीवित करना केवल एक प्राण के समान है। निःसंदेह, अल्लाह सब कुछ सुनने-जानने वाला है।'' [85] [सूरा लुक़मान : 28]