क्या इंसान पर किसी पूज्य पर ईमान रखना अनिवार्य है?
इंसान किसी पूज्य पर ईमान ज़रूर रखता है। चाहे वह ईमान किसी सच्चे माबूद पर रखे या किसी असत्य पूज्य पर। फिर वह उसे पूज्य कहे या कुछ और। उनका यह पूज्य कोई पेड़ भी हो सकता है। आकाश का कोई तारा...
Questions in the guide about faith, belief, the Creator, life and the hereafter.
इंसान किसी पूज्य पर ईमान ज़रूर रखता है। चाहे वह ईमान किसी सच्चे माबूद पर रखे या किसी असत्य पूज्य पर। फिर वह उसे पूज्य कहे या कुछ और। उनका यह पूज्य कोई पेड़ भी हो सकता है। आकाश का कोई तारा...
सच्चा पूज्य वही है, जिसने इस ब्रह्मांड को पैदा किया है और असत्य पूज्यों की इबादत इस दावे पर आधारित है कि वे पू्जय हैं। जबकि पूज्य के लिए सृष्टिकर्ता होना अनिवार्य है। फिर उसके सृष्टिकर्ता...
मध्य पूर्व में ईसाई, यहूदी एवं मुसलमान शब्द "अल्लाह" का प्रयोग पूज्य को बताने के लिए करते हैं। इसका अर्थ होता है एक सत्य पूज्य, जो मूसा एवं ईसा का भी पूज्य है। सृष्टिकर्ता ने पवित्र क़ुरआ...
यह प्रश्न सृष्टिकर्ता के बारे में ग़लत धारणा एवं उसे सृष्टि के समरूप समझने के कारण पैदा हुआ है। यह धारणा तार्किक और दार्शनिक दोनों रूप से अस्वीकृत है। उदाहरण स्वरूप :
सृष्टिकर्ता पर ईमान इस वास्तविकता पर आधारित है कि चीज़ें बिना कारण के प्रकट नहीं होतीं। आपको बस इतना बता देना काफ़ी है कि विशाल भौतिक ब्रह्मांड और उसमें रहने वाले जीव एक अमूर्त चेतना रखते...
हम इंद्रधनुष और मरीचिका देखते हैं, जबकि इनका कोई वजूद नहीं होता। हम गुरुत्वाकर्षण को देखे बिना उसके अस्तित्व को सच मानते हैं, सिर्फ इसलिए कि यह भौतिक विज्ञान द्वारा सिद्ध किया गया है।
उदाहरण के तौर पर, हालाँकि अल्लाह के लिए उच्च उदाहरण है, परन्तु केवल बात समझाने लिए कहा जा सकता है कि जब इंसान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का प्रयोग करता है और उसे बाहर से निर्देशित करता है, तो वह...
जैसा कि प्रसिद्ध है कि मानव रचित संविधान में संप्रभुता के अधिकार या बादशाह के अधिकार से छेड़छाड़ करना दूसरे किसी भी अपराध से बढ़कर है। तो बादशाहों के बादशाह के अधिकार के बारे में आपका क्य...
अल्लाह तआला का पवित्र क़ुरआन की बहुत सारी आयतों में अपने लिए ''हम'' का शब्द प्रयोग करना यह बताता है कि वह एक है, जो सुन्दरता एवं पवित्रता के बहुत सारे गुणों को अपने अंदर समेटे हुए है। इसी...
''आप कह दें कि यह तुम्हारे पालनहार की ओर से यह सत्य है ।जो चाहे ईमान लाए एवं जो चाहे इनकार कर दे।'' [28] [सूरा अल-कहफ़ : 29]
जब इन्सान अपने आपको बहुत अधिक मालदार एवं दानशील पाता है, तो वह अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों को खाने-पीने के लिए बुलाता है।
यदि अल्लाह सृष्टि को अस्तित्व में आने या न आने का एख़्तियार देता, तो इसके लिए ज़रूरी होता सृष्टि का वजूद पहले से रहा हो। क्योंकि बिना अस्तित्व के मानव की कोई राय ही कैसे हो सकती है? यहाँ...
धर्म जीवन व्यतीत करने का तरीक़ा है, जो इंसान के संबंध को उसके सृष्टिकर्ता के साथ एवं उसके आस-पास की चीज़ों के साथ सुनियोजित करता है। धर्म आख़िरत का रास्ता है।
धर्म की आवश्यकता खाने-पीने की आवश्यकता से भी अधिक है। इंसान स्वाभाविक रूप से धार्मिक है। यदि वह सत्य धर्म को नहीं पा सका, तो अपने लिए कोई न कोई धर्म गढ़ लेगा, जैसा कि मूर्तिपूजा पर आधारित...
यह आवश्यक है कि सत्य धर्म इंसान की प्रथम फ़ितरत के अनुसार हो, जिसे बिना किसी मध्यस्थ के अपने सृष्टिकर्ता के साथ सीधे संबंध की आवश्यकता होती है और जो इंसान में सद्गुणों और अच्छे आचरणों का...
जब मानव जाति फ़ना हो जाएगी, जो केवल अल्लाह बाक़ी रह जाएगा, जो हमेशा जीवित रहेगा और जिसे मौत नहीं आनी है। जो व्यक्ति धर्म की छत्रछाया में आचरण के पालन के महत्व को नकारता है, वह उस व्यक्ति...
अक़्ल की भूमिका चीज़ों को आंकने और उनको प्रमाणित करने की है। अतः इंसान के अस्तित्व के उद्देश्य तक अक़्ल का पहुँच न पाना, उसकी भूमिका का ख़त्म हो जाना नहीं है, बल्कि धर्म को यह अवसर प्रदान...
आज (ब्रह्मांड के एक निर्माता के अस्तित्व के) कई खंडनकर्ता मानते हैं कि प्रकाश को समय में सीमित नहीं किया जा सकता है। लेकिन वे इस बात को स्वीकार नहीं करते कि सृष्टिकर्ता समय और स्थान के नि...
ब्रह्मांड के निर्माता के अस्तित्व में विश्वास एक प्रतिबद्धता और जिम्मेदारी है। विश्वास विवेक को सचेत करता है और मोमिन को अपने हर बड़े और छोटे काम के लिए खुद की समीक्षा करने पर उभारता है।...
सही धर्म की परख तीन मुख्य बिंदुओं के आधार पर की जा सकती है [44] : पुस्तक ''ख़ुराफ़तुल इल्हाद'' (नास्तिक्ता का मिथक) का उद्धरित। लेखक : डा० अम्र शरीफ़, प्रकाशन: 2014 ई०।
एक चीज़ है, जिस फ़ितरत-ए-सलीमा या मंतिक़-ए-सलीम कहा जाता है। हर वह चीज़ जो फ़ितरत-ए-सलीमा और सही अक़्ल के अनुरूप हो, वह अल्लाह की तरफ से है, जबकि हर जटिल चीज़ मानव की तरफ़ से है।
इस्लाम धर्म की शिक्षाएँ लचीली तथा जीवन के सभी पहलुओं को शामिल हैं, इसलिए कि यह इंसानी स्वभाव से जुड़ा हुआ है, जिसपर अल्लाह ने इंसान को पैदा किया है। यह धर्म इस स्वभाव के नियमों के अनुरूप...
ईमान के स्तम्भ निम्नलिखित हैं :
मानवता के मार्गदर्शन लिए भेजे गए सभी नबियों एवं रसूलों पर ईमान, ईमान के स्तम्भों में से एक स्तम्भ है। इसके बगैर किसी का ईमान सही नहीं होता है। किसी भी नबी या रसूल का इंकार दीन की बुनियादी...
जहाँ तक फ़रिश्तों की बात है, तो यह अल्लाह की सृष्टियों में से एक महान सृष्टि हैं, जो नूर से पैदा किए गए हैं। उन्हें अच्छा करने के लिए बनाया गया है। वे अल्लाह के आदेशों का पालन करते हैं। अ...
अस्तित्व और घटनाओं के दृष्टांत, सभी इस बात को इंगित करते हैं कि जीवन में हमेशा निर्माण और पुनर्निर्माण का काम चलता रहता है। इसके बहुत सारे उदाहरण हैं, जैसा कि धरती की मृत्यु के बाद बारिश...
अल्ला मुर्दों को उसी तरह ज़िन्दा करेगा, जिस तरह उन्हें पहली बार पैदा किया है।
जिस प्रकार अल्लाह अपने बन्दों को एक ही समय में जीविका प्रदान करता है, उसी प्रकार वह उन का हिसाब लेगा।
ब्रह्मांड में सब कुछ अल्लाह के नियंत्रण में है। वह अकेला ही व्यापक ज्ञान, पूर्ण जानकारी और सब कुछ अपनी इच्छा के अधीन करने की क्षमता और शक्ति रखता है। सृष्टि की शुरुआत से ही सूर्य, ग्रह और...
उदाहरण के तौर पर जब कोई व्यक्ति किसी स्टोर से कुछ खरीदना चाहे और अपने बड़े बेटे को वह चीज़ खरीदने को भेजने का फैसला करे कि उसे पहले से मालूम था कि उसका यह बेटा समझदार है, वह सीधे जाएगा और...
जीवन का मुख्य उद्देश्य सुख की अस्थायी अनुभूति का आनंद लेना नहीं, बल्कि अल्लाह को जानकर और उसकी आराधना करके गहरी आंतरिक शांति प्राप्त करना है।
परीक्षा छात्रों के रैंक और ग्रेड निर्धारित करने के लिए आयोजित की जीती है, जब वे नया व्यवहारिक जीवन शुरू करते हैं। हालांकि परीक्षा छोटी चीज़ होती है, परन्तु यह आगे के नए जीवन में छात्र के...
इंसान को सुख अल्लाह के सामने झुकने, उसकी आज्ञा का पालन करने और उसके निर्णय और भाग्य से संतुष्ट होने से प्राप्त होता है।
हाँ, इस्लाम सबके लिए उपलब्ध है। हर बच्चा अपनी असली फ़ितरत पर पैदा होता है। बिना किसी मध्यस्थ के अपने अल्लाह की इबादत करने वाला (मुसलमान) होकर। माता-पिता, स्कूल या किसी धार्मिक पक्ष के हस्...
सृष्टिकर्ता की तरफ से आने वाला सत्य धर्म अनेक नहीं, केवल एक है। वह है, एक अल्लाह पर ईमान और केवल उसकी इबादत करना। उसके अतिरिक्त जितने भी धर्म हैं, सब मानव निर्मित हैं। उदाहरण स्वरूप हम भा...
इस्लाम धर्म आह्वान, सहिष्णुता और अच्छे तरीके से की जाने वाली बहस पर आधारित है।
ज्ञानोदय की इस्लामी अवधारणा विश्वास और विज्ञान की ठोस नींव पर आधारित है, जो विवेक के ज्ञान और हृदय के ज्ञान को पहले अल्लाह पर ईमान के साथ और फिर विज्ञान के साथ जोड़ती है, जो ईमान से अलग न...
डार्विन के कुछ अनुयायी, जो प्राकृतिक चयन (एक तर्कहीन भौतिक प्रक्रिया) को एक अनूठा रचनात्मक शक्ति मानते थे, जो बिना किसी वास्तविक प्रायोगिक आधार के सभी कठिन विकासवादी समस्याओं को हल करती ह...
इस्लाम इस विचार को पूरी तरह से खारिज करता है और क़ुरआन ने यह स्पष्ट किया है कि अल्लाह तआला ने इंसान के सम्मान के तौर पर आदम -अलैहिस्सलाम- को दूसरी सभी सृष्टियों से अलग करके पैदा किया है,...
विज्ञान एक सामान्य वंश से विकास की अवधारणा पर ठोस सबूत प्रदान करता है, जिसका जिक्र पवित्र क़ुरआन ने किया है।
पवित्र क़ुरआन ने आदम -अलैहिस्सलाम- की रचना की कहानी बताकर विकासवाद की अवधारणा को ठीक किया है :
लोगों के बीच विभिन्न सिद्धांतों और विश्वासों के पाए जाने का मतलब यह नहीं है कि एक सच्चे सत्य का अस्तित्व नहीं है। उदाहरण के तौर पर एक काली कार के मालिक द्वारा उपयोग किए जाने वाले यातायात...
यह अतार्किक है कि अपनी ख़्वाहिश से निर्देशित मानव निर्धारित करे कि बलात्कार बुरा है कि नहीं। यह स्पष्ट है कि बलात्कार अपने आप में मानव अधिकार का उल्लंघन और उसके महत्व एवं स्वतंत्रता को छी...
एक व्यापक वास्तविकता के अस्तित्व का न होना, जिसे बहुत-से लोग अपनाए हुए हैं, यह अपने आप में ऐसी चीज़ पर ईमान लाना है, जो सही भी है और ग़लत भी। वे इसे दूसरों पर लागू करने की कोशिश करते हैं।...
अंतरिक्ष में तैर रही पृथ्वी पर मनुष्यों की उपस्थिति ऐसे ही है, जैसे विभिन्न संस्कृतियों से संबंध रखने वाले यात्री एक विमान पर एकत्र हो जाएँ और वह उन्हें अज्ञात दिशा की ओर ले जाए और यह पता...
उदाहरण के तौर पर क्या ईसाई यह नहीं मानते कि मुसलमान काफ़िर है, क्योंकि वह ट्रिनिटी के सिद्धांत में विश्वास नहीं रखता और उनकी मान्यता अनुसार उसपर विश्वास किए बिना (आकाश में) नेक लोगों के स...
क़ुरआन में ऐसी बहुत-सी आयतें हैं, जो बन्दों के लिए अल्लाह की दया और प्रेम का उल्लेख करती हैं। परन्तु बन्दा के लिए अल्लाह की मुहब्बत बन्दों के एक-दूसरे से प्रम की तरह नहीं है। क्योंकि मानव...
"जब उसने अपनी जाति से कहा : क्या तुम ऐसी निर्लज्जता का काम कर रहे हो, जो तुमसे पहले संसारवासियों में से किसी ने नहीं किया है? तुम स्त्रियों को छोड़कर कामवासना की पूर्ति के लिए पुरुषों के...
अल्लाह उन लोगों के लिए क्षमाशील और दयालु है, जो बिना किसी जिद के और मानव स्वभाव और मनुष्य की कमज़ोरी के कारण पाप करते हैं, फिर उसके सामने तौबा करते हैं और अपने गुनाहों द्वारा अल्लाह को चु...
बुराई अल्लाह की तरफ से नहीं आती है। बुराइयाँ अस्तित्वगत मामले नहीं हैं। अस्तित्व केवल अच्छाई का है।
सृष्टिकर्ता ने प्रकृति के नियम और उन्हें संचालित करने वाली पद्धतियाँ स्थापित कर रखी हैं। ये नियम और पद्धतियाँ किसी पर्यावरणीय असंतुलन या खराबी की स्थिति में खुद को खुद के द्वारा बचाने का...
अल्लाह के अस्तित्व को नकारने के बहाने के रूप में इस सांसारिक जीवन में बुराई के अस्तित्व के कारण के बारे में प्रश्न करने वाला, हमारे सामने अपनी अदूरदर्शिता, उसके पीछे की हिकमत के संबंध में...
उदाहरण के तौर पर जो व्यक्ति अपने माता-पिता का तिरस्कार करता है, उनका अपमान करता है, उन्हें घर से बाहर निकाल देता है और उन्हें सड़क पर डाल देता है, हम उस व्यक्ति के बारे में क्या महसूस करे...
वास्तव में, अल्लाह चाहता है कि उसके सभी बंदे ईमान ले आएँ।
कई अपराधों में उम्रकैद की सजा होती है। क्या कोई है जो कहता है कि उम्रकैद की सजा अनुचित है, क्योंकि अपराधी ने कुछ ही मिनटों में अपना अपराध किया? क्या दस साल की सजा अन्यायपूर्ण है, क्योंकि...
माँ अपने बच्चों को यात्रा या काम पर जाते समय आते-जाते अपना ध्यान रखने की चेतावनी देकर बहुत थका देती है, तो क्या वह एक क्रूर माँ मानी जाती है? यह मामला को उलटा पेश करने का मामला है, जो दया...
अल्लाह तआला ने अपने सभी बन्दों को मुक्ति का मार्ग दिखाया है और वह उनके लिए अविश्वास को पसंद नहीं करता है। साथ ही वह ग़लत व्यवहार को पसंद नहीं करता है, जो इंसान कुफ़्र एवं धरती पर बिगाड़ क...
हमें ईमान एवं सारे संसारों के रब के प्रति समर्पण के बीच अंतर करना होगा।
इस ब्रह्मांड के चारों ओर तलाश करना एवं ज्ञान प्राप्त करना मनुष्य का अधिकार है। अल्लाह ने हमें यह बुद्धि इसलिए दी है, ताकि हम इसका प्रयोग करें, न कि इसे बेकार छोड़ दें। जो भी व्यक्ति अपनी...
इन लोगों पर महान अल्लाह अत्याचार नहीं करेगा, मगर क़यामत के दिन उनकी परीक्षा लेगा?
इन आयतों में जीवन की यात्रा के अंत और सुरक्षित स्थान तक पहुंचने का सार बताया गया है।