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ඉස්ලාම් සමාජ අයිතීන් ආරක්ෂා කරන්නේ කෙසේද?

Ethics, rights and dealings
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इस्लाम हमें सिखाता है कि सामाजिक कर्तव्य प्यार, दया और दूसरों के प्रति सम्मान पर आधारित होने चाहिएँ।

इस्लाम ने समाज को जोड़ने वाले सभी रिश्तों के आधार, मानदंड एवं नियम बनाए हैं और सभी रिश्तों के अधिकार तथा कर्तव्य तय किए हैं।

''तथा अल्लाह की इबादत करो और किसी चीज़ को उसका साझी न बनाओ तथा माता-पिता, रिश्तेदारों, अनाथों, निर्धनों, नातेदार पड़ोसी, अपरिचित पड़ोसी, साथ रहने वाले साथी, यात्री और अपने दास-दासियों के साथ अच्छा व्यवहार करो। निःसंदेह अल्लाह उससे प्रेम नहीं करता, जो इतराने वाला, डींगें मारने वाला हो।'' [260] [सूरा अल-निसा : 36]

''तथा उनके साथ भली-भाँति जीवन व्यतीत करो। फिर यदि तुम उन्हें नापसंद करो, तो संभव है कि तुम किसी चीज़ को नापसंद करो और अल्लाह उसमें बहुत ही भलाई रख दे।'' [261] [सूरा अल-निसा : 19]

''ऐ ईमान वालो! जब तुमसे कहा जाए कि सभाओं में जगह कुशादा कर दो, तो कुशादा कर दिया करो। अल्लाह तुम्हारे लिए विस्तार पैदा करेगा। तथा जब कहा जाए कि उठ जाओ, तो उठ जाया करो। अल्लाह तुममें से उन लोगों के दर्जे ऊँचे[8] कर देगा, जो ईमान लाए तथा जिन्हें ज्ञान प्रदान किया गया है। तथा तुम जो कुछ करते हो, अल्लाह उससे भली-भाँति अवगत है।'' [262] [सूला अल-मुजादला : 11]

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