දෙවියෙකු පිළිබඳ විශ්වාසය පුද්ගලයෙකුට තිබිය යුතු ද?
इंसान किसी पूज्य पर ईमान ज़रूर रखता है। चाहे वह ईमान किसी सच्चे माबूद पर रखे या किसी असत्य पूज्य पर। फिर वह उसे पूज्य कहे या कुछ और। उनका यह पूज्य कोई पेड़ भी हो सकता है। आकाश का कोई तारा...
ඉස්ලාම් ආගම පිළිබඳ පොදු ප්රශ්නවලට පිළිතුරු සැපයීම තුලින් මෙම ශ්රේෂ්ඨ ආගම මිනිසුන්ට හඳුන්වා දීම, මෙම ග්රන්ථයේ අරමුණුයි. තවද විවිධ ශිෂ්ටාචාර, ජනවර්ග, සමකාලීන සිදුවීම් සහ සංවර්ධනයන් උකහා ගැන...
Only categories with actual current content are shown.
Questions in the guide about faith, belief, the Creator, life and the hereafter.
View questions →7QuranPublished questions in the guide about the Quran, its revelation, preservation and related topics.
View questions →18Prophethood and seerahQuestions in the guide about Prophet Muhammad, revelation, prophethood and seerah.
View questions →10Islam and societyQuestions about society, legislation, civilization and social and economic balance.
View questions →10Family and womenQuestions in the guide related to family, women, marriage and family rights.
View questions →14Ethics, rights and dealingsQuestions about justice, rights, dealings, food, finance and conduct.
View questions →8WorshipQuestions in the guide related to the pillars of Islam, prayer, Hajj and worship.
View questions →Results are progressively disclosed while all links remain in the HTML.
इंसान किसी पूज्य पर ईमान ज़रूर रखता है। चाहे वह ईमान किसी सच्चे माबूद पर रखे या किसी असत्य पूज्य पर। फिर वह उसे पूज्य कहे या कुछ और। उनका यह पूज्य कोई पेड़ भी हो सकता है। आकाश का कोई तारा...
सच्चा पूज्य वही है, जिसने इस ब्रह्मांड को पैदा किया है और असत्य पूज्यों की इबादत इस दावे पर आधारित है कि वे पू्जय हैं। जबकि पूज्य के लिए सृष्टिकर्ता होना अनिवार्य है। फिर उसके सृष्टिकर्ता...
मध्य पूर्व में ईसाई, यहूदी एवं मुसलमान शब्द "अल्लाह" का प्रयोग पूज्य को बताने के लिए करते हैं। इसका अर्थ होता है एक सत्य पूज्य, जो मूसा एवं ईसा का भी पूज्य है। सृष्टिकर्ता ने पवित्र क़ुरआ...
यह प्रश्न सृष्टिकर्ता के बारे में ग़लत धारणा एवं उसे सृष्टि के समरूप समझने के कारण पैदा हुआ है। यह धारणा तार्किक और दार्शनिक दोनों रूप से अस्वीकृत है। उदाहरण स्वरूप :
सृष्टिकर्ता पर ईमान इस वास्तविकता पर आधारित है कि चीज़ें बिना कारण के प्रकट नहीं होतीं। आपको बस इतना बता देना काफ़ी है कि विशाल भौतिक ब्रह्मांड और उसमें रहने वाले जीव एक अमूर्त चेतना रखते...
हम इंद्रधनुष और मरीचिका देखते हैं, जबकि इनका कोई वजूद नहीं होता। हम गुरुत्वाकर्षण को देखे बिना उसके अस्तित्व को सच मानते हैं, सिर्फ इसलिए कि यह भौतिक विज्ञान द्वारा सिद्ध किया गया है।
उदाहरण के तौर पर, हालाँकि अल्लाह के लिए उच्च उदाहरण है, परन्तु केवल बात समझाने लिए कहा जा सकता है कि जब इंसान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का प्रयोग करता है और उसे बाहर से निर्देशित करता है, तो वह...
जैसा कि प्रसिद्ध है कि मानव रचित संविधान में संप्रभुता के अधिकार या बादशाह के अधिकार से छेड़छाड़ करना दूसरे किसी भी अपराध से बढ़कर है। तो बादशाहों के बादशाह के अधिकार के बारे में आपका क्य...
अल्लाह तआला का पवित्र क़ुरआन की बहुत सारी आयतों में अपने लिए ''हम'' का शब्द प्रयोग करना यह बताता है कि वह एक है, जो सुन्दरता एवं पवित्रता के बहुत सारे गुणों को अपने अंदर समेटे हुए है। इसी...
''आप कह दें कि यह तुम्हारे पालनहार की ओर से यह सत्य है ।जो चाहे ईमान लाए एवं जो चाहे इनकार कर दे।'' [28] [सूरा अल-कहफ़ : 29]
जब इन्सान अपने आपको बहुत अधिक मालदार एवं दानशील पाता है, तो वह अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों को खाने-पीने के लिए बुलाता है।
यदि अल्लाह सृष्टि को अस्तित्व में आने या न आने का एख़्तियार देता, तो इसके लिए ज़रूरी होता सृष्टि का वजूद पहले से रहा हो। क्योंकि बिना अस्तित्व के मानव की कोई राय ही कैसे हो सकती है? यहाँ...
धर्म जीवन व्यतीत करने का तरीक़ा है, जो इंसान के संबंध को उसके सृष्टिकर्ता के साथ एवं उसके आस-पास की चीज़ों के साथ सुनियोजित करता है। धर्म आख़िरत का रास्ता है।
धर्म की आवश्यकता खाने-पीने की आवश्यकता से भी अधिक है। इंसान स्वाभाविक रूप से धार्मिक है। यदि वह सत्य धर्म को नहीं पा सका, तो अपने लिए कोई न कोई धर्म गढ़ लेगा, जैसा कि मूर्तिपूजा पर आधारित...
यह आवश्यक है कि सत्य धर्म इंसान की प्रथम फ़ितरत के अनुसार हो, जिसे बिना किसी मध्यस्थ के अपने सृष्टिकर्ता के साथ सीधे संबंध की आवश्यकता होती है और जो इंसान में सद्गुणों और अच्छे आचरणों का...
जब मानव जाति फ़ना हो जाएगी, जो केवल अल्लाह बाक़ी रह जाएगा, जो हमेशा जीवित रहेगा और जिसे मौत नहीं आनी है। जो व्यक्ति धर्म की छत्रछाया में आचरण के पालन के महत्व को नकारता है, वह उस व्यक्ति...
अक़्ल की भूमिका चीज़ों को आंकने और उनको प्रमाणित करने की है। अतः इंसान के अस्तित्व के उद्देश्य तक अक़्ल का पहुँच न पाना, उसकी भूमिका का ख़त्म हो जाना नहीं है, बल्कि धर्म को यह अवसर प्रदान...
आज (ब्रह्मांड के एक निर्माता के अस्तित्व के) कई खंडनकर्ता मानते हैं कि प्रकाश को समय में सीमित नहीं किया जा सकता है। लेकिन वे इस बात को स्वीकार नहीं करते कि सृष्टिकर्ता समय और स्थान के नि...
ब्रह्मांड के निर्माता के अस्तित्व में विश्वास एक प्रतिबद्धता और जिम्मेदारी है। विश्वास विवेक को सचेत करता है और मोमिन को अपने हर बड़े और छोटे काम के लिए खुद की समीक्षा करने पर उभारता है।...
सही धर्म की परख तीन मुख्य बिंदुओं के आधार पर की जा सकती है [44] : पुस्तक ''ख़ुराफ़तुल इल्हाद'' (नास्तिक्ता का मिथक) का उद्धरित। लेखक : डा० अम्र शरीफ़, प्रकाशन: 2014 ई०।
एक चीज़ है, जिस फ़ितरत-ए-सलीमा या मंतिक़-ए-सलीम कहा जाता है। हर वह चीज़ जो फ़ितरत-ए-सलीमा और सही अक़्ल के अनुरूप हो, वह अल्लाह की तरफ से है, जबकि हर जटिल चीज़ मानव की तरफ़ से है।
इस्लाम धर्म की शिक्षाएँ लचीली तथा जीवन के सभी पहलुओं को शामिल हैं, इसलिए कि यह इंसानी स्वभाव से जुड़ा हुआ है, जिसपर अल्लाह ने इंसान को पैदा किया है। यह धर्म इस स्वभाव के नियमों के अनुरूप...
ईमान के स्तम्भ निम्नलिखित हैं :
मानवता के मार्गदर्शन लिए भेजे गए सभी नबियों एवं रसूलों पर ईमान, ईमान के स्तम्भों में से एक स्तम्भ है। इसके बगैर किसी का ईमान सही नहीं होता है। किसी भी नबी या रसूल का इंकार दीन की बुनियादी...
जहाँ तक फ़रिश्तों की बात है, तो यह अल्लाह की सृष्टियों में से एक महान सृष्टि हैं, जो नूर से पैदा किए गए हैं। उन्हें अच्छा करने के लिए बनाया गया है। वे अल्लाह के आदेशों का पालन करते हैं। अ...
अस्तित्व और घटनाओं के दृष्टांत, सभी इस बात को इंगित करते हैं कि जीवन में हमेशा निर्माण और पुनर्निर्माण का काम चलता रहता है। इसके बहुत सारे उदाहरण हैं, जैसा कि धरती की मृत्यु के बाद बारिश...
अल्ला मुर्दों को उसी तरह ज़िन्दा करेगा, जिस तरह उन्हें पहली बार पैदा किया है।
जिस प्रकार अल्लाह अपने बन्दों को एक ही समय में जीविका प्रदान करता है, उसी प्रकार वह उन का हिसाब लेगा।
ब्रह्मांड में सब कुछ अल्लाह के नियंत्रण में है। वह अकेला ही व्यापक ज्ञान, पूर्ण जानकारी और सब कुछ अपनी इच्छा के अधीन करने की क्षमता और शक्ति रखता है। सृष्टि की शुरुआत से ही सूर्य, ग्रह और...
उदाहरण के तौर पर जब कोई व्यक्ति किसी स्टोर से कुछ खरीदना चाहे और अपने बड़े बेटे को वह चीज़ खरीदने को भेजने का फैसला करे कि उसे पहले से मालूम था कि उसका यह बेटा समझदार है, वह सीधे जाएगा और...
जीवन का मुख्य उद्देश्य सुख की अस्थायी अनुभूति का आनंद लेना नहीं, बल्कि अल्लाह को जानकर और उसकी आराधना करके गहरी आंतरिक शांति प्राप्त करना है।
परीक्षा छात्रों के रैंक और ग्रेड निर्धारित करने के लिए आयोजित की जीती है, जब वे नया व्यवहारिक जीवन शुरू करते हैं। हालांकि परीक्षा छोटी चीज़ होती है, परन्तु यह आगे के नए जीवन में छात्र के...
इंसान को सुख अल्लाह के सामने झुकने, उसकी आज्ञा का पालन करने और उसके निर्णय और भाग्य से संतुष्ट होने से प्राप्त होता है।
हाँ, इस्लाम सबके लिए उपलब्ध है। हर बच्चा अपनी असली फ़ितरत पर पैदा होता है। बिना किसी मध्यस्थ के अपने अल्लाह की इबादत करने वाला (मुसलमान) होकर। माता-पिता, स्कूल या किसी धार्मिक पक्ष के हस्...
सृष्टिकर्ता की तरफ से आने वाला सत्य धर्म अनेक नहीं, केवल एक है। वह है, एक अल्लाह पर ईमान और केवल उसकी इबादत करना। उसके अतिरिक्त जितने भी धर्म हैं, सब मानव निर्मित हैं। उदाहरण स्वरूप हम भा...
इस्लाम धर्म आह्वान, सहिष्णुता और अच्छे तरीके से की जाने वाली बहस पर आधारित है।
ज्ञानोदय की इस्लामी अवधारणा विश्वास और विज्ञान की ठोस नींव पर आधारित है, जो विवेक के ज्ञान और हृदय के ज्ञान को पहले अल्लाह पर ईमान के साथ और फिर विज्ञान के साथ जोड़ती है, जो ईमान से अलग न...
डार्विन के कुछ अनुयायी, जो प्राकृतिक चयन (एक तर्कहीन भौतिक प्रक्रिया) को एक अनूठा रचनात्मक शक्ति मानते थे, जो बिना किसी वास्तविक प्रायोगिक आधार के सभी कठिन विकासवादी समस्याओं को हल करती ह...
इस्लाम इस विचार को पूरी तरह से खारिज करता है और क़ुरआन ने यह स्पष्ट किया है कि अल्लाह तआला ने इंसान के सम्मान के तौर पर आदम -अलैहिस्सलाम- को दूसरी सभी सृष्टियों से अलग करके पैदा किया है,...
विज्ञान एक सामान्य वंश से विकास की अवधारणा पर ठोस सबूत प्रदान करता है, जिसका जिक्र पवित्र क़ुरआन ने किया है।
पवित्र क़ुरआन ने आदम -अलैहिस्सलाम- की रचना की कहानी बताकर विकासवाद की अवधारणा को ठीक किया है :
लोगों के बीच विभिन्न सिद्धांतों और विश्वासों के पाए जाने का मतलब यह नहीं है कि एक सच्चे सत्य का अस्तित्व नहीं है। उदाहरण के तौर पर एक काली कार के मालिक द्वारा उपयोग किए जाने वाले यातायात...
यह अतार्किक है कि अपनी ख़्वाहिश से निर्देशित मानव निर्धारित करे कि बलात्कार बुरा है कि नहीं। यह स्पष्ट है कि बलात्कार अपने आप में मानव अधिकार का उल्लंघन और उसके महत्व एवं स्वतंत्रता को छी...
एक व्यापक वास्तविकता के अस्तित्व का न होना, जिसे बहुत-से लोग अपनाए हुए हैं, यह अपने आप में ऐसी चीज़ पर ईमान लाना है, जो सही भी है और ग़लत भी। वे इसे दूसरों पर लागू करने की कोशिश करते हैं।...
अंतरिक्ष में तैर रही पृथ्वी पर मनुष्यों की उपस्थिति ऐसे ही है, जैसे विभिन्न संस्कृतियों से संबंध रखने वाले यात्री एक विमान पर एकत्र हो जाएँ और वह उन्हें अज्ञात दिशा की ओर ले जाए और यह पता...
उदाहरण के तौर पर क्या ईसाई यह नहीं मानते कि मुसलमान काफ़िर है, क्योंकि वह ट्रिनिटी के सिद्धांत में विश्वास नहीं रखता और उनकी मान्यता अनुसार उसपर विश्वास किए बिना (आकाश में) नेक लोगों के स...
क़ुरआन सारे संसारों के रब द्वारा भेजी गई सबसे आखिरी किताब है। मुसलमान उन सभी पुस्तकों पर विश्वास रखते हैं, जो क़ुरआन से पहले उतारी गई थीं, जैसे कि इब्राहिम के स़हीफ़े, ज़बूर, तोरात और इंज...
यदि क़ुरआन यहूदियों के यहाँ से लिया गया होता, तो वे खुद बढ़-चढ़कर इसकी निस्बत अपनी ओर कर लेते। लेकिन क्या यहूदियों ने वह्य के उतरने के समय इस तरह का कोई दावा किया?
प्राचीन सभ्यताएँ सही ज्ञानों एवं बहुत सारी किंवदंतियों और मिथकों का संग्रह थीं। एक अशिक्षित नबी जो एक बंजर रेगिस्तान में पला-बढ़ा हो, इन सभ्यताओं से केवल सत्य को लेने और किंवदंतियों को छो...
दुनिया में हजारों भाषाएं और बोलियां हैं। यदि उनमें से किसी भी एक भाषा में उतारा जाता, तो लोग प्रश्न करते कि दूसरी भाषा में क्यों नहीं उतारा गया? अल्लाह प्रत्येक रसूल को उसके समुदाय की भाष...
नासिख़ और मंसूख़ शरीयत के आदेशों में विकास का नाम है। मसलन पूर्व के आदेश को लागू करने से रोक देना, बाद में आने वाले किसी आदेश द्वारा उसे बदल देना, मुतलक़ (अनियत) को मुक़ैयद (नियत) करना या...
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने क़ुरआन को अपने विभिन्न साथियों के हाथ में विश्वस्त एवं संकलित रूप में छोड़ा, ताकि उसे पढ़ा और दूसरों को पढ़ाया जा सके। फिर जब अबू बक्र -रज़ियल्ल...
इस्लाम प्रयोगात्मक विज्ञान के विरुद्ध नहीं है। वास्तव में, कई पश्चिमी विद्वान जो अल्लाह में विश्वास नहीं रखते, अपनी वैज्ञानिक खोजों के माध्यम से सृष्टिकर्ता के अस्तित्व की अनिवार्यता तक प...
नबी मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- बिन अब्दुल्लाह बिन अब्दुल मुत्तलिबब बिन हाशिम, अरब के क़बीला क़ुरैश से हैं, जो मक्का में रहता था। आप इस्माईल बिन इब्राहीम -उन दोनों पर अल्लाह की शां...
मानव प्रौद्योगिकी ने एक ही क्षण में दुनिया के सभी हिस्सों में मानव आवाज और छवियों को पहुँचा दिया, तो क्या 1400 साल से अधिक पहले मानव जाति के सृष्टिकर्ता के लिए आत्मा और शरीर के साथ अपने प...
हम सहीह बुख़ारी (जो हदीस की सबसे प्रामाणिक पुस्तक है) में रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के लिए आयशा -अल्लाह उनसे राज़ी हो- की गहरी मुहब्बत की बात पाते हैं और देखते हैं कि उन्होंने इस शा...
बनू कुरैज़ा के यहूदियों ने वचन तोड़ा था और मुसलमानों को ख़त्म करने के लिए बहुदेववादियों का साथ दिया था। चुनांचे उनके इस षडयंत्र ने उन्हीं को नष्ट कर दिया, जब उनको धोखे एवं वचन तोड़ने का प...
पहली आयत : ''धर्म में कोई ज़बरदस्ती नहीं है। सत्य असत्य से स्पष्ट हो चुका है।'' [154] यह आयत एक महान इस्लामी नियम को स्थापित करती है। वह नियम यह है कि धर्म के मामले में ज़ोर-ज़बरदस्ती नही...
ईमान बन्दा एवं उसके रब के बीच के रिश्ते को कहते हैं। जिसने उसे काटना चाहा, उसका मामला अल्लाह के हवाले है। मगर जो इसका एलान करना चाहता है और इसे इस्लाम से लड़ने, उसके चेहरे को बिगाड़ने या...
पैगंबर मूसा एक योद्ध थे और दाऊद भी एक योद्धा थे। मूसा और मुहम्मद ने, उन दोनों पर अल्लाह की शांति हो, राजनीतिक और सांसारिक मामलों की बागडोर संभाली और दोनों ने बुतपरस्त समुदाय से हिजरत की।...
जिहाद का अर्थ है : गुनाहों से बचने के लिए अपनी आत्मा से लड़ना। गर्भावस्था का दर्द सहने के लिए गर्भावस्था में मां का संघर्ष भी जिहाद है। एक छात्र का पढ़ाई में मेहनत करना भी जिहाद है। अपने...
यह अतार्किक है कि जीवन देने वाला, जिसे जीवन दिया गया है, उसे आदेश दे कि वह अपना या किसी निर्दोष का जीवन बिना किसी अपराध के ले ले। वह तो कहता है : ''अपने आपकी हत्या मत करो।'' [166] इसके अल...
शब्द सैफ़ (तलवार) पवित्र क़ुरआन में एक बार भी नहीं आया है। वो देश जहाँ इस्लामी इतिहास ने जंगें नहीं देखीं, वहीं आज दुनिया के अधिकांश मुसलमान रहते हैं। उदाहरण के तौर पर इंडोनेशिया, भारत और...
मुसलमान नेक लोगों और रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथियों के मार्ग पर चलते हैं, उनसे मुहब्बत करते हैं, उन्हीं ही तरह नेक बनने की कोशिश करते हैं और उन लोगों की तरह ही एक अल्लाह की इब...
मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- न सुन्नी थे और न शिया। आप शुद्ध मुस्लिम थे। इसी तरह ईसा -अलैहिस्सलाम- न कैथोलिक थे और न और कुछ। दोनों बिना मध्यस्थ के एक अल्लाह के बन्दे थे। ईसा ने स्वय...
इमाम का अर्थ वह व्यक्ति है, जो लोगों को नमाज़ पढ़ाए, उनकी देख-भाल करे या उनका नेतृत्व करे। यह कुछ खास लोगों तक सीमित धार्मिक पद नहीं है। इस्लाम में कोई जातिवाद या पुरोहितवाद नहीं है। इस्ल...
नबी वह है जिसकी ओर वह्य (प्रकाशन) भेजी जाती है, परन्तु वह कोई नया संदेश या कार्यप्रणाली लेकर नहीं आता, जबकि रसूल वह है जिसे अल्लाह, उसके समुदाय के अनुरूप नई कार्यप्रणाली एवं शरीयत देकर भे...
मानव के लिए जो उपयुक्त हो सकता है, वह उन्हीं की तरह मानव ही हो सकता है, जो उन्हीं की भाषा में उनसे बात करे और उनके लिए आदर्श हो। यदि उनकी ओर किसी फ़रिश्ते को रसूल बनाकर भेज जाता और वह कोई...
वह्य के माध्यम से सृष्टिकर्ता के सृष्टि से संबंध साधने के कुछ प्रमाणों इस प्रकार हैं :
मानव पिता आदम -अलैहिस्सलाम- के वर्जित पेड़ से खा लेने के कारण, उनकी तौबा स्वीकार करने के समय अल्लाह ने जो मानव को पाठ पढ़ाया, वह सारे संसारों के रब के द्वारा मानव को क्षमा करने का पहला उद...
अल्लाह जो सारे संसार का सृष्टिकर्ता है, ज़िन्दा तथा नित्य स्थायी है। बेनियाज़ एवं सक्षम है। उसे मानवता के लिए मसीह का रूप धारण करके सूली पर चढ़कर जान देने की आवश्यकता नहीं है, जैसा कि ईसा...
एक मुसलमान पति अपनी ईसाई या यहूदी पत्नी के मौलिक धर्म, उसकी धार्मिक पुस्तक एवं उसके रसूल का सम्मान करता है। बल्कि उसका ईमान इसके बग़ैर पूरा ही नहीं होता है। वह उसे अपने धर्म को मानने की स...
इस्लामी सभ्यता ने अपने सृष्टिकर्ता के साथ अच्छा व्यवहार किया है और सृष्टिकर्ता और उसकी सृष्टि के बीच के संबंध को सही जगह पर रखा है। जबकि अन्य मानव सभ्यताओं ने अल्लाह के साथ अच्छा मामला नह...
धर्म अच्छे आचरण और बुरे कर्मों से बचने का आह्वान करता है। इस प्रकार, कुछ मुसलमानों का बुरा व्यवहार उनकी सांस्कृतिक आदतों या उनके धर्म की अज्ञानता और सच्चे धर्म से उनकी दूरी के कारण होता है।
पश्चिमी अनुभव मध्य युग में लोगों की क्षमताओं और दिमागों पर चर्च और राज्य के प्रभुत्व और गठबंधन की प्रतिक्रिया के रूप में आया। इस्लामिक व्यवस्था की व्यवहारिकता और तर्क को देखते हुए इस्लामी...
मुसलमानों के पास लोकतंत्र से बेहतर व्यवस्था है, जिसे शूरा व्यवस्था (विचार विमर्श पर आधारित व्यवस्था) कहते हैं।
पृथ्वी पर उपद्रव का इरादा रखने वालों को रोकने और दंडित करने के लिए सीमाएँ निर्धारित की गई हैं। इसकी दलील यह है कि भूख और अत्यधिक आवश्यकता के कारण चोरी करने या ग़लती से हत्या करने के मामलो...
इस्लाम का एक सामान्य नियम यह है कि सभी प्रकार के धन अल्लाह के हैं और लोग इसके प्रभारी मात्र हैं और धन को केवल अमीरों के बीच घूमते रहना नहीं चाहिए। इस्लाम ने ज़कात के रास्ते से फ़क़ीरों एव...
उदाहरण के तौर पर इस्लाम की आर्थिक व्यवस्था और पूंजीवाद तथा समाजवाद के बीच एक सरल तुलना से यह स्पष्ट हो जाता है कि इस्लाम ने यह संतुलन कैसे सुनिश्चित किया है।
अतिवाद, कठोरता और असहिष्णुता यह ऐसे गुण हैं, जिनसे सच्चे धर्म ने मूल रूप से मना किया है। पवित्र क़ुरआन ने कई आयतों में व्यवहार में दया और करुणा को अपनाने और क्षमा और सहिष्णुता के सिद्धांत...
धर्म मूल रूप से लोगों को उनके द्वारा खुद पर लगाए गए कई प्रतिबंधों से राहत दिलाने के लिए आता है। उदाहरण स्वरूप, इस्लाम से पूर्व जाहिलियत के समय कई घिनौनी प्रथाएँ फैल गई थीं, जैसे लड़कियों...
"ऐ नबी! अपनी पत्नियों, अपनी बेटियों और ईमान वाले लोगों की स्त्रियों से कह दें कि वे अपने ऊपर अपनी चादरें डाल लिया करें। यह इसके अधिक निकट है कि वे पहचान ली जाएँ, फिर उन्हें कष्ट न पहुँचाय...
यदि सर ढ़ाँपना पिछड़ापन है तो क्या आदम -अलैहिस्सलाम- के पीछे भी कोई युग है? जबसे अल्लाह ने आदम -अलैहिस्सलाम- एवं उनकी पत्नी को पैदा किया और उन्हें जन्नत में जगह दी, उसी समय से उनके लिए पर...
पुरुषों और महिलाओं के बीच शारीरिक संरचना में अंतर है, इस बात पर दुनिया एकमत है। इसका एक स्पष्ट प्रमाण यह है कि पुरुषों की तैराकी के कपड़े पश्चिम में महिलाओं के कपड़ों से अलग हैं। फ़ितना क...
मुस्लिम महिलाएं न्याय चाहती हैं, समानता नहीं। पुरुषों के साथ समानता से वह अपने कई अधिकारों और विशेषताओं को खो देंगी। मान लीजिए किसी व्यक्ति के दो पुत्र हैं। उनमें से एक की उम्र पांच साल औ...
वैश्विक आँकड़ों के अनुसार, पुरुषों और महिलाओं का जन्म लगभग समान दर से होता है। यह वैज्ञानिक रूप से ज्ञात है कि महिला बच्चों के बचने और जीवित रहने की संभावना लड़कों की तुलना में अधिक होती...
एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु जिसे आधुनिक समाज में अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है, वह अधिकार है, जो इस्लाम ने महिलाओं को दिया है और पुरुषों को नहीं दिया है। एक पुरुष की शादी केवल अविवाहित महि...
मर्द का औरत पर पर्यवेक्षक बनाया जाना औरत का सम्मान एवं मर्द की ज़िम्मेदारी बढ़ाना है, क्योंकि मर्द औरत की देख-भाल तथा उसकी ज़रूरतों को पूरा करता है। मुस्लिम महिलाएँ रानी की भूमिका निभाती...
इस्लाम से पहले, महिलाओं को विरासत से वंचित कर दिया गया था। जब इस्लाम आया, तो उसे विरासत में शामिल किया। औरत को पुरुषों की तुलना में अधिक या उनके बराबर हिस्सा भी मिलता है। कुछ हालतों में व...
मुहम्मद -शांति और आशीर्वाद उनपर हो- ने अपने जीवन में कभी किसी महिला को नहीं मारा। जहाँ तक क़ुरआन की उस आयत का संबंध है, जिसमें मारने के बारे में बताया गया है, तो इसका अर्थ अवज्ञा के मामले...
इस्लाम ने महिलाओं को आदम के पाप के बोझ से मुक्त करके उन्हें सम्मानित किया, जबकि अन्य धर्मों में उसे इससे मुक्त नहीं किया गया है।
व्यभिचार के अपराध के गंभीर दंड के संंबंध में यहूदी धर्म, ईसाई धर्म और इस्लाम के बीच पूर्ण सहमति है। [223] [ओल्ड टेस्टामेंट, Book of Leviticus : 20: 10 –18]
इस्लाम ने लोगों के बीच न्याय और नाप-तौल में निष्पक्षता स्थापित करने का आह्वान किया है।
"और (ऐ बंदे) तेरे पालनहार ने आदेश दिया है कि उसके सिवा किसी की इबादत न करो, तथा माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार करो। यदि तेरे पास दोनों में से एक या दोनों वृद्धावस्था को पहुँच जाएँ, तो उन्...
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : “अल्लाह की क़सम! वह व्यक्ति मोमिन नहीं है, अल्लाह की क़सम! वह व्यक्ति मोमिन नहीं है, अल्लाह की क़सम! वह व्यक्ति मोमिन नहीं है।” प...
''तथा धरती में न कोई चलने वाला है तथा न कोई उड़ने वाला, जो अपने दो पंखों से उड़ता है, परंतु तुम्हारी जैसी जातियाँ हैं। हमने पुस्तक में किसी चीज़ की कमी नहीं छोड़ी। फिर वे अपने पालनहार की...
''तथा धरती में उसके सुधार के पश्चात् बिगाड़ न पैदा करो, और उसे भय और लोभ के साथ पुकारो। निःसंदेह अल्लाह की दया अच्छे कर्म करने वालों के क़रीब है।'' [256] [सूरा अल-आराफ़ : 56]
इस्लाम हमें सिखाता है कि सामाजिक कर्तव्य प्यार, दया और दूसरों के प्रति सम्मान पर आधारित होने चाहिएँ।
इस्लाम अनाथ के लालन-पालन करने की प्रेरणा देता है और अनाथ का लालन-पालन करने वाले से आग्रह करता है कि वह अनाथ के साथ वैसा ही व्यवहार करे जैसा वह अपने बच्चों के साथ करता है। परन्तु अनाथ का अ...
मांस प्रोटीन का मूल स्रोत है। इसी तरह इन्सान के कुछ दाँत चिपटे और कुछ नुकीले होते हैं। ये दांत मांस चबाने और पीसने के काम आते हैं। अल्लाह ने मनुष्य को पौधों और जानवरों को खाने के लिए उपयु...
जानवर को ज़बह करने का इस्लामी तरीक़ा, जिसमें जानवर के गले और अन्ननली को तेज चाकू से काट दिया जाता है, बिजली का झटका देकर मारने तथा दम घोंटकर मारने से अधिक दयापूर्ण तरीक़ा है। क्योंकि मस्त...
पशु की आत्मा और मानव आत्मा के बीच एक बड़ा अंतर है। जानवर की आत्मा शरीर को हरकत देने वाली शक्ति है। जब यह मृत्यु के कारण उसके शरीर से अलग हो जाती है, तो वह एक निर्जीव लाश बन जाता है। यह भी...
यह अल्लाह की अपनी सृष्टि पर रहमत और दया है कि उसने हमें स्वच्छ चीज़ों को खाने का आदेश दिया है एवं बुरी चीजों के खाने से मना किया है।
इस्लाम में धन का उद्देश्य व्यापार, वस्तुओं एवं सेवाओं का आदान-प्रदान, निर्माण और आबादकारी है। अतः जब हम कमाने के उद्देश्य से धन उधार देते हैं, तो हम धन को आदान-प्रदान और विकास का साधन बना...
अल्लाह तआला ने अक़्ल देकर मनुष्य को अन्य सभी प्राणियों से अलग किया है और हमपर उन चीज़ों को हराम किया है, जो हमारी अक़्ल या शरीर को हानि पहुँचाएँ। इसलिए उसने हमपर हर नशा लाने वाली चीज़ को...
सृष्टिकर्ता के एक होने की गवाही और स्वीकृति देना और उसी की इबादत करना, साथ ही यह स्वीकार करना कि मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- उसके बन्दे एवं उसके रसूल हैं।
मुसलमान अपने रब के आज्ञापालन में नमाज़ पढ़ता है, जिसने उसे नमाज़ पढ़ने का आदेश दिया है एवं नमाज़ को इस्लाम के स्तंभों में से एक स्तंभ बनाया है।
मुसलमान पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की शिक्षाओं का पालन करता है और ठीक उसी तरह नमाज़ पढ़ता है, जैसे पैगंबर ने नमाज़ पढ़ी थी।
अल्लाह ने पवित्र घर काबा [297] को इबादत के लिए पहला घर और मोमिनों की एकता का प्रतीक बनाया है, जिसकी ओर सभी मुसलमान नमाज़ के समय मुँह करते हैं और इस तरह वे धरती के विभिन्न क्षेत्रों से दाय...
पूरे इतिहास में काबा का बहुत उल्लेख किया गया है। अरब प्रायद्वीप के सबसे दूरस्थ हिस्सों से भी लोग सालाना इसका भ्रमण करते और पूरे अरब प्रायद्वीप के लोग इसकी पवित्रता का सम्मान करते रहे हैं।...
बुतपरस्त धर्मों और कुछ निर्धारित स्थानों तथा प्रतीकों का सम्मान करने के बीच एक बड़ा अंतर है, चाहे वो धार्मिक हों या राष्ट्रीय या सामुदायिक।
उदाहरण के लिए, क्या हम किसी को अपने पिता के पत्र वाले लिफाफे को चूमने के लिए दोषी ठहराते हैं? हज के सभी काम अल्लाह के ज़िक्र को स्थापित करने के लिए एवं सारे संसार के रब की आज्ञाकारिता और...
हज के दौरान भीड़ से मौत चंद सालों को छोड़कर नहीं हुई है। आम तौर पर भीड़ से मरने वालों की संख्या भी बहुत कम होती है। लेकिन उदाहरण स्वरूप, शराब पीने के कारण मरने वालों की संख्या लाखों में ह...
क़ुरआन में ऐसी बहुत-सी आयतें हैं, जो बन्दों के लिए अल्लाह की दया और प्रेम का उल्लेख करती हैं। परन्तु बन्दा के लिए अल्लाह की मुहब्बत बन्दों के एक-दूसरे से प्रम की तरह नहीं है। क्योंकि मानव...
"जब उसने अपनी जाति से कहा : क्या तुम ऐसी निर्लज्जता का काम कर रहे हो, जो तुमसे पहले संसारवासियों में से किसी ने नहीं किया है? तुम स्त्रियों को छोड़कर कामवासना की पूर्ति के लिए पुरुषों के...
अल्लाह उन लोगों के लिए क्षमाशील और दयालु है, जो बिना किसी जिद के और मानव स्वभाव और मनुष्य की कमज़ोरी के कारण पाप करते हैं, फिर उसके सामने तौबा करते हैं और अपने गुनाहों द्वारा अल्लाह को चु...
बुराई अल्लाह की तरफ से नहीं आती है। बुराइयाँ अस्तित्वगत मामले नहीं हैं। अस्तित्व केवल अच्छाई का है।
सृष्टिकर्ता ने प्रकृति के नियम और उन्हें संचालित करने वाली पद्धतियाँ स्थापित कर रखी हैं। ये नियम और पद्धतियाँ किसी पर्यावरणीय असंतुलन या खराबी की स्थिति में खुद को खुद के द्वारा बचाने का...
अल्लाह के अस्तित्व को नकारने के बहाने के रूप में इस सांसारिक जीवन में बुराई के अस्तित्व के कारण के बारे में प्रश्न करने वाला, हमारे सामने अपनी अदूरदर्शिता, उसके पीछे की हिकमत के संबंध में...
उदाहरण के तौर पर जो व्यक्ति अपने माता-पिता का तिरस्कार करता है, उनका अपमान करता है, उन्हें घर से बाहर निकाल देता है और उन्हें सड़क पर डाल देता है, हम उस व्यक्ति के बारे में क्या महसूस करे...
वास्तव में, अल्लाह चाहता है कि उसके सभी बंदे ईमान ले आएँ।
कई अपराधों में उम्रकैद की सजा होती है। क्या कोई है जो कहता है कि उम्रकैद की सजा अनुचित है, क्योंकि अपराधी ने कुछ ही मिनटों में अपना अपराध किया? क्या दस साल की सजा अन्यायपूर्ण है, क्योंकि...
माँ अपने बच्चों को यात्रा या काम पर जाते समय आते-जाते अपना ध्यान रखने की चेतावनी देकर बहुत थका देती है, तो क्या वह एक क्रूर माँ मानी जाती है? यह मामला को उलटा पेश करने का मामला है, जो दया...
अल्लाह तआला ने अपने सभी बन्दों को मुक्ति का मार्ग दिखाया है और वह उनके लिए अविश्वास को पसंद नहीं करता है। साथ ही वह ग़लत व्यवहार को पसंद नहीं करता है, जो इंसान कुफ़्र एवं धरती पर बिगाड़ क...
हमें ईमान एवं सारे संसारों के रब के प्रति समर्पण के बीच अंतर करना होगा।
इस ब्रह्मांड के चारों ओर तलाश करना एवं ज्ञान प्राप्त करना मनुष्य का अधिकार है। अल्लाह ने हमें यह बुद्धि इसलिए दी है, ताकि हम इसका प्रयोग करें, न कि इसे बेकार छोड़ दें। जो भी व्यक्ति अपनी...
इन लोगों पर महान अल्लाह अत्याचार नहीं करेगा, मगर क़यामत के दिन उनकी परीक्षा लेगा?
इन आयतों में जीवन की यात्रा के अंत और सुरक्षित स्थान तक पहुंचने का सार बताया गया है।
ඉස්ලාම් ආගම පිළිබඳ පොදු ප්රශ්නවලට පිළිතුරු සැපයීම තුලින් මෙම ශ්රේෂ්ඨ ආගම මිනිසුන්ට හඳුන්වා දීම, මෙම ග්රන්ථයේ අරමුණුයි. තවද විවිධ ශිෂ්ටාචාර, ජනවර්ග, සමකාලීන සිදුවීම් සහ සංවර්ධනයන් උකහා ගැනීමේ දී එහි සුවිශේෂත්වය, වෙනස සහ නම්යශීලී බව පෙන්නුම් කිරීමයි. එමෙන්ම මෙම ග්රන්ථයේ තවත් එක් අරමුණක් වනුයේ එය ත්රස්තවාදයක් ලෙස හුවා දක්වන සහ ඊට එරෙහිව සටන් කිරීමට මිනිසුන් තල්ලු කරන ඊට එරෙහිව ගෙන යන නිෂේධාත්මක ප්රචාර හමුවේ එහි ප්රතිරූපය සහ එහි ස්ථීරභාවය කැළැල් කිරීමට ද්වේෂ සහගත උත්සාහයන් නොතකා එහි කල්පැවැත්ම සහ නොනැසී පැවතීමට ඇති හැකියාව ද පෙන්නුම් කිරීමයි.
තවද මෙම ග්රන්ථය සත්යය සොයන අයටත් ප්රබුද්ධ මනසින් හා විවෘත හදවතින් බලන අයටත් මාර්ගය ආලෝකමත් කරන පහනක් බවට පත් කරන ලෙස ද ඉස්ලාම් ආගම ගැන සැමට ඉගෙනීම සඳහා ආමන්ත්රණය කරන සාමයේ පණිවිඩයක් බවට පත් කරන ලෙස ද මම සර්වබලධාරී අති උත්තරීතර දෙවිඳුන්ගෙන් ඉල්ලා සිටිමි.