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ඉස්ලාමයේ සතුන් මැරීමේ ක්රමය අමානුෂික නොවේද?

Ethics, rights and dealings
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जानवर को ज़बह करने का इस्लामी तरीक़ा, जिसमें जानवर के गले और अन्ननली को तेज चाकू से काट दिया जाता है, बिजली का झटका देकर मारने तथा दम घोंटकर मारने से अधिक दयापूर्ण तरीक़ा है। क्योंकि मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह बंद हो जाने मात्र से पशु को दर्द महसूस होना बंद हो जाता है। जानवर को ज़बह करते समय उसका उठ खड़ा होना दर्द के कारण नहीं, बल्कि रक्त के तेज प्रवाह के कारण है। जिससे जानवर का रक्त आसानी के साथ बाहर निकल जाता है। जबकि दूसरी पद्धतियों में रक्त अंदर रुका रह जाता है, जिसके कारण उसका मांस हानिकारक हो जाता है।

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : ''अल्लाह तआला ने हर चीज़ में अच्छे बरताव को अनिवार्य किया है। अतः, जब तुम क़त्ल करो तो अच्छे अंदाज़ में क़त्ल करो, और जब ज़बह करो तो अच्छे अंदाज़ में ज़बह करो। तुम अपनी छुरी को तेज़ कर लो और अपने ज़बीहा- ज़बह किए जाने वाले जानवर- को आराम पहुँचाओ।'' [275] [इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।]

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